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अतुल के. तिवारी
प्रत्येक ग्रामीण नर्धन, विशेषत: गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों को आवास उपलब्ध कराने की अवधारणा ने 1985 के आसपास जन्म लिया था। उस समय की नौवीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत सामाजिक अवस्थापना हेतु बनाई गई विशेष कार्य योजना में आवास को प्राथमिकता वाला क्षेत्र का स्थान दिया गया था, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आश्रय विहीनता अर्थात आवास के अभाव को दूर करना था। मानवीय अस्तित्व के लिए इसे अत्यन्त महत्वपूर्ण माना जाता है। लोगों के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए अवासीय सुविधा का होना अनिवार्य है। इसीलिए सरकार ने अर्थिक रूप से कमजोर और निम्न आय समूह के लोगों की आवासीय आवश्यकता की पूर्ति के लिए इंदिरा आवास योजना शुरू की है। यह योजना 2005-06 से महत्वाकांक्षी भारत निर्माण का अनिवार्य अंग बन चुकी है।

इंदिरा आवास योजना की विशेषता यह है कि इसके वित्त पोषण में केन्द्र और राज्यों का योगदान 75 : 25 के अनुपात में होता है। पूर्वोत्तर राज्यों के मामले में केन्द्र और राज्यों के बीच वित्त पोषण 90 : 10 के अनुपात में होता है। केन्द्रशासित प्रदेशों में इंदिरा आवास योजना में सारा पैसा केन्द्र सरकार ही लगाती है।

मैदानी क्षेत्रों में गरीबी रेखा से नीचे के (बीपीएल) परिवारों को 45,000 रुपए का अनुदान दिया जाता है जबकि पर्वतीय दुर्गम क्षेत्रों में घर बनाने के लिए 48,500 रुपए का अनुदान दिया जाता है। इंदिरा आवास योजना के मकानों को राष्ट्रीयकृत बैंकों की विभेदीकृत ब्याज दर योजना के अन्तर्गत भी शामिल कर लिया गया है। इसके तहत प्रति आवासीय इकाई के निर्माण के लिए 4 प्रतिशत की दर से 20,000 रुपए तक का त्रऽण दिया जाता है, जो इंदिरा आवास योजना के तहत दी जाने वाली आर्थिक सहायता के अतिरिक्त होती है।

राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों को किए जाने वाले आबंटन का आधार दो प्रकार से निर्धारित किया जाता है। आवासीय सुविधाओं के अभाव के लिए 75 प्रतिशत का वेटेज (महत्व) दिया जाता है और निर्धनता के अनुपात को 25 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है। जिलों में आबंटन के लिए आवास सुविधाओं के अभाव को 75 प्रतिशत वेटेज दिया जाता है, जबकि अनुसूचित जाति अनूसूचित जनजाति की जनसंख्या को 25 प्रतिशत का वेटेज दिया जाता है। इसके साथ ही, इंदिरा आवास योजना का 60 प्रतिशत आबंटन अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए किया जाता है। शारीरिक रूप से विकलांग लोगों के लिए 3 प्रतिशत और अल्पसंख्यक परिवारों के लिए 15 प्रतिशत का आबंटन किया जाता है। 

आवासीय इकाइयों (मकानों) का आवंटन हितग्राही परिवार की महिला सदस्य के नाम पर ही किया जाता है। वैकल्पिक तौर पर पति और पत्नी, दोनों के नाम पर संयुक्त रूप से मकान आबंटित किए जाते हैं। यदि परिवार में कोई पात्र महिला सदस्य नहीं होती है तभी पुरुष सदस्य के नाम पर आबंटन किया जाता है। 

इंदिरा आवास योजना के अन्तर्गत आबंटित कुल राशि की 5 प्रतिशत राशि प्राकृतिक आपदाओं और दंगा-फसाद, आगजनी, अग्निकांड, पुनर्वास जैसी असाधारण और असामान्य परिस्थितियों के कारण उत्पन्न आवश्यकताओं के लिए पृथक से सुरक्षित रखी जाती है। इस संबंध में अतिरिक्त राशि के लिए राज्य सरकारों को आवश्यक संस्तुति करनी होती है। इस राशि का बंटवारा केन्द्र और राज्य के बीच 75 : 25 के अनुपात में होता है। इस प्रकार की सहायता की ऊपरी सीमा जिले के वार्षिक आवंटन का 10 प्रतिशत अथवा 70 लाख रुपए प्रति जिला रखी गई है। इनमें से जो भी राशि एक वर्ष में अधिक होती है, उसे ही स्वीकार किया जाता हे। 

हितग्राहियों के चयन में पारदर्शिता लाने के लिए राज्यों केन्द्र शासित प्रदेशों को पंचायतवार इंदिरा आवास योजना की स्थायी प्रतीक्षा सूची बनानी होती है। इस सूची में बीपीएल परिवारों के उन पात्र लोगों के नाम शामिल होते हैं, जिन्हें 2002 की सूची के आधार पर निर्धनता की स्थिति के अनुसार मकान की आवश्यकता होती है। 

इस आवास योजना के तहत बनाए जाने वाले मकानों में स्वच्छ शौचालय और धुआं रहित चूल्हों का आवश्यक रूप से निर्माण किया जाता है। स्वच्छ शौचालय के निर्माण के लिए हितग्राही, इंदिरा आवास योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता के अतिरिक्त संपूर्ण स्वच्छता अभियान (टीएससी) के अन्तर्गत दी जाने वाली सहायता का लाभ भी ले सकता है।

इंदिरा आवास योजना के प्रारंभ होने के बाद इसके अन्तर्गत अब तक 5 खरब 90 अरब 53 करोड़ 22 लाख रुपए के व्यय से 2 करोड़ 38 लाख 25 हजार मकान बनाए जा चुके हैं।

नए प्रयास
इंदिरा आवासीय योजना के आवासों के लिए वित्तीय सहायता में वृध्दि
इंदिरा आवास योजना के अन्तर्गत आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए दी जाने वाली वित्तीय सहायता में पहली अप्रैल, 2010 से वृध्दि की गई है। मैदानी क्षेत्रों के बीपीएल परिवारों को दी जाने वाली सहायता 35,000 रुपए से बढाक़र 45,000 रुपए कर दी गई है। इसी प्रकार, पर्वतीय दुर्गम क्षेत्रों के बीपीएल परिवारों के लिए दी जाने वाली राशि 38,500 रुपए से बढाक़र 48,500 रुपए कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, वित्तीय सेवायें विभाग ने भारतीय रिजर्व बैंक को इंदिरा आवास योजना के मकानों को विभेदीकृत ब्याज दर योजना में शामिल करने की सलाह दी है, जिसके अंतर्गत 4 प्रतिशत की दर पर 20,000 रुपए तक की राश त्रऽण के रूप मे दी जा सकती है। मौजूदा कच्चे मकानों को पक्का अर्ध्द पक्का मकानों में बदलने के लिए 15,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी जाती है। यह राशि समूचे देश में एक समान है। 

वित्त पोषण पध्दति में परिवर्तन
इंदिरा आवास योजना एक केन्द्र प्रवर्तित योजना है। केन्द्र और राज्य सरकारें इस पर होने वाले व्यय को 75 और 25 के अनुपात में साझा करती हैं। परन्तुख् पूर्वोत्तर राज्यों और सिक्किम के मामले में स्थानीय सरकारें लागत राशि का 10 प्रतिशत व्यय वहन करती हैं, जबकि केन्द्र शेष 90 प्रतिशत का व्यय वहन करता है। केन्द्र शासित प्रदेशों के मामले में योजना का पूरा व्यय केन्द्र सरकार ही वहन करती है।

प्राकृतिक आपदाओं में सहायता के दिशानिर्देशों में परिवर्तन
इंदिरा आवास योजना में 5 प्रतिशत की राशि प्राकृतिक आपदाओं के लिए अलग से रखी जाती है। इसमें से दी जाने वाली सहायता राशि बढाक़र जिले के वार्षिक आवंटन के 10 प्रतिशत के बराबर या 70 लाख रुपए, जो भी अधिक हो, कर दी गई है। पहले यह राशि 50 लाख रुपए तक सीमित थी।

बीपीएल अल्पसंख्यकों हेतु पृथक राशि का निर्धारण
बीपीएल अल्पसंख्यकों के लिए वर्ष 2006-07 से अलग से लक्ष्य निर्धारित होता है और इनके लिए अलग से धनराशि का भी आवबंटन किया जाता है।

खेतों में मकान हेतु भूखंड का आबंटन
मंत्रालय ने एनएसएसओ (राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण संगठन) के 50 वें और 59वें दौर की रिपोर्ट के आधार पर जो अनुमान लगाया है उसके अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में 77 लाख बीपीएल परिवार ऐसे हैं जिनके पास मकान बनाने के लिए कोई जगह (भूखंड) नहीं है। ऐसे भूमिहीन और निर्धन लोगों के लिए, जिनके पास आवासीय भूखंड नहीं हैं, खेतों में ही मकान बनाने की जगह मुहैया कराना जरूरी है ताकि वे सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत दी जाने वाली सहायता का लाभ उठा कर अपना घर बना सकें। तद्नुसार, इंदिरा आवास योजना के तहत अगस्त, 2009 में ग्रामीण बीपीएल परिवारों को खेतों में ही मकान बनाने की जगह (होमस्टेड साइट्स) देने की योजना शुरू की गई। इस योजना के तहत उन ग्रामीण बीपीएल परिवारों को 100-250 वर्ग मीटर की जगह, मकान बनाने के लिए दी जाएगी, जिनके पास न तो अपना कोई भूखंड है और न ही कोई जमीन। इस उद्देश्य के लिए जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) को प्रति हितग्राही 10,000 रुपए के हिसाब से सहायता दी जाएगी। केन्द्र और राज्य इसका आधा-आधा खर्च उठायेंगे। इस योजना के तहत बिहार, कर्नाटक, केरल, राजस्थान और सिक्किम को राशि जारी की जा चुकी है। 

भारत निर्माण कार्यक्रम
ग्रामीण आवास, भारत निर्माण कार्यक्रम के 6 घटकों में से एक है। भारत निर्माण के अन्तर्गत, 2005-06 से लेकर 2008-09 तक के चार वर्षों में देशभर में 60 लाख मकान बनाने का लक्ष्य तय किया गया था। इस लक्ष्य की तुलना में 71 लाख 76 हजार मकान बनाए गए और इनके निर्माण पर 2 खरब 17 अरब 20 करोड़ 39 लाख रुपए खर्च किये गए। वर्ष 2009-10 से प्रारंभ पांच वर्ष की अवधि में मकान निर्माण के लक्ष्य को दो गुना कर एक करोड़ 20 लाख रुपए करने का प्रस्ताव है।

विभिन्न केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं का इंदिरा विकास योजना में मिलान
विभिन्न केन्द्र प्रवर्तित योजनाओं का मिलान इंदिरा आवास योजना के साथ करने के लिए आवश्यक निर्देश सभी जिला ग्रामीण विकास अभकरणों को जारी किये जा चुके हैं। इंदिरा आवास योजना के हितग्राही राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना (आरजीजीवीवाई), सम्पूर्ण स्वच्छता अभियान (टीएससी), जनश्री बीमा आम आदमी बीमा योजना, विभेदीकृत ब्याज दर (डीआरआई) योजना आदि का भी लाभ उठा सकते हैं।

आरजीजीवीवाई के तहत इंदिरा आवास योजना का प्रत्येक हितग्राही अपने घर में नि:शुल्क विद्युत कनेक्शन का लाभ ले सकता है और टी.एस.सी योजना के तहत स्वच्छ शौचालय बनाने के लिए 2200 रुपए की अतिरिक्त सहायता मिल सकती है। सभी इच्छुक हितग्राहियों को जनश्री बीमा और आम आदमी बीमा योजना का भी लाभ मिल सकता है। इसके अतिरिक्त डीआरआई योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही राष्ट्रीयकृत बैंक से बीस हजार रुपए का ऋण 4 प्रतिशत के ब्याज पर ले सकता है।

प्रत्येक ग्रामीण गरीब को आश्रय अर्थात उसके सिर पर छत की सुविधा मुहैया कराना सरकार के निर्धनता उन्मूलन कार्यक्रम का एक प्रमुख घटक भविष्य में भी बना रहेगा। इसीलिए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने भारत निर्माण के प्रथम चरण (2005-09) के 60 लाख मकान निर्माण के लक्ष्य को उसके दूसरे चरण (2009-12) में दो गुना कर एक करोड़ 20 लाख कर दिया है। आशा है, इस प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में आवासीय इकाइयों के अभाव को दूर किया जा सकेगा और ग्रामीण गरीबों को भी अपना सिर छिपाने के लिए सम्मानजनक जगह मिल सकेगी।


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