फ़िरदौस ख़ान
दुनियाभर में कट्टरपंथी देश माना जाने वाला पाकिस्तान अब हिन्दुओं के लिए बदल रहा है. ये वही देश है, जहां मुसलमानों का एक फ़िरक़ा दूसरे फ़िरक़े को बर्दाश्त नहीं कर पाता. जहां मक़बूल क़व्वाल को सरेआम गोलियों से भून दिया जाता है. मस्जिदों और मज़ारों को तबाह किया जाता है, नमाज़ियों और ज़ायरीनों का बेरहमी से क़त्ल किया जाता है. उसी पाकिस्तान की हुकूमत पिछले कुछ अरसे से हिन्दू समुदाय के साथ नरम रुख़ अख़्तियार किए हुए है. हिन्दुओं की ज़िन्दगी को बेहतर बनाने के लिए सरकार कई क़दम उठा रही है.

फ़िलहाल पाकिस्तान में हिन्दू विवाह विधेयक को मंज़ूरी मिल गई है. पाकिस्तान के राष्ट्रपति प्रेसीडेंट ममनून हुसैन ने हिन्दू अल्पसंख्यकों की शादियों को क़ानूनी मान्यता देने के लिए संसद से पारित हिन्दू विवाह अधिनियम को मंजूरी दे दी है. पाकिस्तान में हिन्दू विवाह अधिनियम विधेयक-2017 को सीनेट की मंज़ूरी मिल गई है. नेशनल असेंबली इस विधेयक को 15 सितंबर 2015 को पहले ही मंज़ूरी दे चुकी है. यह हिन्दू समुदाय का पहला विस्तारित पर्सनल लॉ है. यह विधेयक पाकिस्तान के पंजाब, बलूचिस्तान और ख़ैबर पख़्तूनख़्वा में लागू होगा. सिंध प्रांत पहले ही अपना हिन्दू विवाह क़ानून बना चुका है. अब पाकिस्तान की हिन्दू महिलाओं को उनके विवाह का प्रमाण-पत्र मिल सकेगा. विवाह के 15 दिनों के भीतर इसका पंजीकरण कराना होगा. इससे पहले वे अपने विवाह को पंजीकृत नहीं करा सकती थीं. इस विधेयक के प्रावधान के मुताबिक़, विवाह के वक़्त लड़का और लड़की दोनों की उम्र 18 साल से ज़्यादा होनी चाहिए. महिला को पति की मौत के छह महीने बाद दूसरा विवाह करने का अधिकार होगा. पहली पत्नी के रहते हुए कोई हिन्दू दूसरा विवाह नहीं कर पाएगा. अगर उसने ऐसा किया, तो उसे छह महीने की क़ैद की सज़ा होगी और पांच हज़ार रुपये के जुर्माने का प्रावधान भी है. इस क़ानून में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा का भी इंतज़ाम किया गया है. पति-पत्नी अगर एक साल से अलग रह रहे हैं और तलाक़ लेना चाहते हैं, तो वे ऐसा कर पाएंगे.

हिन्दू विवाह अधिनियम का एक बड़ा फ़ायदा ये होगा कि इससे हिन्दू महिलाओं के जबरन धर्मान्तरण कराने पर रोक लग सकेगी. हिन्दुओं का आरोप है कि विवाह पंजीकरण न होने की वजह से उन्हें कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ता है. नाबालिग़ हिन्दू लड़कियों का अपहरण कर लिया जाता है, जबरन उनका धर्म परिवर्तन कराया जाता है, उनके साथ ज़बरदस्ती की जाती है, ज़ोर-ज़बर से उनका विवाह कराया जाता है.  विधवा हिन्दू महिलाओं की हालत भी अच्छी नहीं है. उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जाता है. महिलाओं के पास विवाह का सबूत भी होगा. महिलाओं को तलाक़ लेने, जबरन विवाह और 18 साल से पहले विवाह करने जैसे दबाव के ख़िलाफ़  शिकायत करने का हक़ मिल जाएगा. पहले महिलाओं को इंसाफ़ पाने के लिए दर-दर भटकना पड़ता था. अपने विवाह को साबित करने के लिए उनके पास कोई दस्तावेज़ नहीं होता था. आज़ादी के सात दशक बाद भी हिन्दू समुदाय के लोग पुनर्विवाह, संतान गोद लेने और उत्तराधिकार जैसे क़ानूनी अधिकारों से वंचित थे.
हिन्दू समुदाय के लोगों का मानना है कि इस नये क़ानून से उन्हें पहचान-पत्र बनवाने में आसानी हो जाएगी. उन्हें बैंक का खाता खोलने, वीज़ा के लिए आवेदन करने, राष्ट्रीय पहचान पत्र मिलने, सरकारी सुविधाएं लेने और जायदा में हिस्सेदारी जैसे कई फ़ायदे मिल पाएंगे.

क़ाबिले-ग़ौर है कि पाकिस्तान में सरकार हिन्दुओं की समस्याओं के समाधान पर ख़ास तवज्जो दे रही है. क़ानून मंत्री जाहिद हमीद ने जब विधेयक को सीनेट में पेश किया, तो किसी ने भी इसका विरोध नहीं किया. प्रासंगिक स्थायी समितियों में सभी सियासी दलों के सांसदों ने हमदर्दी ज़ाहिर करते हुए सर्वसम्मति से पास होने दिया. बीते माह पाक के कटास राज मंदिर परिसर में वाटर फ़िल्ट्रेशन प्लांट का उदघाटन करते हुए नवाज़ शरीफ़ ने कहा था, "मैं सिर्फ़ मुसलमान पाकिस्तानियों का नहीं, अल्पसंख्यकों का भी प्रधानमंत्री हूं. बहुत जल्द पाकिस्तान को अल्पसंख्यकों के दोस्त के तौर पर देखा जाएगा.''

तक़रीबन एक साल पहले पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हिन्दू समुदाय के लोगों को धार्मिक अनुष्ठानों के लिए ख़ास जगह मुहैया कराई गई, ताकि अंतिम संस्कार के लिए वे श्मशान घाट बना सकें. हिंदू समुदाय के लोग अब तक अंतिम संस्कार के लिए बौद्धधर्मियों के श्मशान घाट का इस्तेमाल करते रहे हैं.

साल 1998 की जनगणना के मुताबिक़ पाकिस्तान में 95 फ़ीसद आबादी मुसलमानों की है और ग़ैर-मुस्लिम महज़ पांच फ़ीसद हैं, जिनमें हिंदू, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी, जैन वग़ैरह शामिल हैं. अकेले हिन्दुओं की बात करें, तो इनकी आबादी दो फ़ीसद है. साल 1998 की जनगणना के मुताबिक़ पाकिस्तान में तक़रीबन 25 लाख हिन्दू थे. पाकिस्तान में सबसे ज़्यादा अल्पसंख्यक सिंध प्रांत में रहते हैं. पहले सिंध के हिन्दू विवाह को मान्यता देने के लिए स्थानीय पंचायत, पाकिस्तान हिंदू कौंसिल और स्थानीय यूनियन कौंसिल की शरण लेते थे. स्थानीय पंचायत और पाकिस्तान हिन्दू कौंसिल में विवाह का पंजीकरण कराना आसान था, जबकि यूनियन कौंसिल में पंकीकरण कराने में कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था.
पाकिस्तान के सर्वोच्च न्यायालय ने नेशनल डेटाबेस एंड रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी (एनएडीआरए) को हिन्दू विवाह को पंजीकृत कराने का आदेश दिया था. इसके बाद साल 2014 के आख़िर में नेशनल डेटाबेस रजिस्ट्रेशन ऑथॉरिटी ने अल्पसंख्यकों के विवाह का पंजीकरण शुरू किया था.

अफ़सोस की बात यह है कि पाकिस्तान के कट्टरपंथियों को हिन्दुओं के लिए बना यह क़ानून रास नहीं आ रहा है. कुछ संगठनों ने इस विधेयक का विरोध किया है. उन्होंने इसे इस्लाम के सिद्धांतों के ख़िलाफ़ बताया है. जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फ़ज़ल के सीनेटर मुफ़्ती अब्दुल सत्तार का कहना है कि ऐसी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए देश का संविधान काफ़ी है.

इसमें कोई दो राय नहीं कि क़ानून को बनाना एक बात है और उसे लागू करना दूसरी बात. बहरहाल, इस क़ानून से पाकिस्तान के हिन्दुओं को कुछ राहत मिलने की उम्मीद है.


أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ

أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ
I Love Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam

फ़िरदौस ख़ान का फ़हम अल क़ुरआन पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें

या हुसैन

या हुसैन

फ़िरदौस ख़ान की क़लम से

Star Web Media

सत्तार अहमद ख़ान

सत्तार अहमद ख़ान
संस्थापक- स्टार न्यूज़ एजेंसी

ई-अख़बार पढ़ें

ब्लॉग

  • नाम का पास - फ़िल्म 'गाइड' में नायक राजू को रात में ठंड से ठिठुरता देखकर कोई उसे ज़र्द कपड़ा ओढ़ा जाता है. इसी कपड़े की वजह से गांववाले उसे संत-महात्मा समझ लेते हैं. वह गा...
  • اچھا خواب - رسول اللہ ﷺ نے فرمایا: “اگر تم میں سے کوئی اچھا خواب دیکھے تو خوش ہو اور صرف اس کو بتائے جو اس سے محبت کرتا ہے۔” حوالہ: صحیح مسلم ، حدیث نمبر: 5902 ...
  • Sayyida Fatima al-Zahra Salamullah Alaiha - On this blessed 20th of Jamadi al-Thani, we celebrate the birth of Sayyida Fatima al-Zahra alamullah Alaiha — the Lady of Light, the Mother of the Imams,...
  • میرے محبوب - بزرگروں سے سناہے کہ شاعروں کی بخشش نہیں ہوتی وجہ، وہ اپنے محبوب کو خدا بنا دیتے ہیں اور اسلام میں اللہ کے برابر کسی کو رکھنا شِرک یعنی ایسا گناہ مانا جات...
  • उमरपुरा के सिख भाइयों ने बनवाई मस्जिद - *डॉ. फ़िरदौस ख़ान * हमारे प्यारे हिन्दुस्तान की सौंधी मिट्टी में आज भी मुहब्बत की महक बरक़रार है. इसलिए यहां के बाशिन्दे वक़्त-दर-वक़्त इंसानियत, प्रेम और भाई...
  • 25 सूरह अल फ़ुरक़ान - सूरह अल फ़ुरक़ान मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 77 आयतें हैं. *अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है*1. वह अल्लाह बड़ा ही बाबरकत है, जिसने हक़ ...
  • ਅੱਜ ਆਖਾਂ ਵਾਰਿਸ ਸ਼ਾਹ ਨੂੰ - ਅੱਜ ਆਖਾਂ ਵਾਰਿਸ ਸ਼ਾਹ ਨੂੰ ਕਿਤੋਂ ਕਬੱਰਾਂ ਵਿਚੋਂ ਬੋਲ ਤੇ ਅੱਜ ਕਿਤਾਬੇ-ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਕੋਈ ਅਗਲਾ ਵਰਕਾ ਫੋਲ ਇਕ ਰੋਈ ਸੀ ਧੀ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਤੂੰ ਲਿਖ ਲਿਖ ਮਾਰੇ ਵੈਨ ਅੱਜ ਲੱਖਾਂ ਧੀਆਂ ਰੋਂਦੀਆਂ ਤ...

एक झलक

Followers

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

साभार

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं