महंगाई से परेशानी !
हवा चबाकर, पी लें पानी ??
बेतहाशा बढ़ीं कीमतें !
आसमान की जगह घरों की, चटक गयी हैं कई छतें !!
कसा शिकंजा !
अब तू दिखा, लड़ाकर पंजा !!
अनशन जारी रहेगा !
भूख पर भारी रहेगा ??
बहिष्कार !
कार्य नहीं करने का सबको, लोकतंत्र में है अधिकार !!
मांगा भुगतान !
भुगत लिया सबसे अपमान ??
परमाणु बम !
अपने इस्तेमाल के डर से, रहती हैं इसकी आंखें नम !!
जागरूकता !
लोगों को जगवाकर बंदा, सोने से नहीं चूकता !!
ईरान !
दुनिया की बातें सुनने को, इस्तेमाल कर ही मत कान !!
व्यापारी !
व्यापारी-नेता बनकर तू, अपने काम करा सरकारी !!
ख़फ़ा !
राजनीति में हो जाता है, इससे अक्सर बड़ा नफ़ा !!
-अतुल मिश्र
ग़ालिब की डायरी है दस्तंबू
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*फ़िरदौस ख़ान*
हिन्दुस्तान के बेहतरीन शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने उर्दू शायरी को नई ऊंचाई दी.
उनके ज़माने में उर्दू शायरी इश्क़, मुहब्बत, विसाल, हिज्र और हुस्...
