रूप सलोना, मेरे बंसी वारे का !
जब भी उन्हें ध्यान में लाऊं,
मैं वारि-वारि हो जाऊं,
बंसी की धुन ऐसी आये,
जैसे कोयल गीत सुनाये,
रंग सांवला ऐसा मेरे प्यारे का !
रूप सलोना मेरे बंसी वारे का !!
दुष्टों का संहार किया था,
जरासंध को मार दिया था,
माखन खूब चुराकर खाया,
'माखन चोर' तभी कहलाया,
क्या बखान हो, मां के ऐसे तारे का !
रूप सलोना, ऐसा मेरे बंसी वारे का !!
ऐसी लीलाएं दिखलाए,
समझ किसी की भी ना आये,
जब वे असली रूप दिखाते,
गोप-गोपियां भी डर जाते,
रूप सुहाता, मुझको नन्द-दुलारे का !
रूप सलोना, मेरे बंसी वारे का !!
-महिमा कपूर
ग़ालिब की डायरी है दस्तंबू
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*फ़िरदौस ख़ान*
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