महंगाई आसमान पर !
आसमान बोला, "महंगाई,रहो इसी स्थान पर !!"
नए साल का धमाल !
महंगाई ने नाच नचाकर, सचमुच काफी किया कमाल !!
नए साल की मस्ती !
कुछ को महंगी लगी सवेरे, कुछ को उम्मीदों से सस्ती !!
खाद्य पदार्थों के दाम !
महंगाई के घर पर सारे, करते है आकर आराम !!
हादसे !
कान पुलिस के खड़े हुए हैं, यह सुनने के बाद से !!
ठिठुरन !
ऐसा लगता है, ग़रीब की, हो जैसे वो सगी बहन !!
सनसनी !
फैलाकर, मिल गया 'मनी' ??
जश्न !
महंगाई ने खूब रुलाया, इनकम से जब पूछे प्रश्न !!
गिरा पारा !
नंगे बदन, भूख ने पूछा,"जाने क्या हो हश्र हमारा ??"
घना कोहरा !
खुद को खुद ही ढूंढ रहे थे, मिस्टर मोतीलाल वोहरा !!
- अतुल मिश्र
जुमेरात...
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*-डॉ. फ़िरदौस ख़ान *
28 जनवरी, 2016... जुमेरात का दिन, एक यादगार दिन था... कभी न भूलने वाला
दिन... मुहब्बत की शिद्दत से सराबोर दिन, इबादत से लबरेज़ दिन, एक...
