नव किरणें मुस्काकर लाईं नये वर्ष का नव पैगाम।
कोयल कूक रही है जग में गूंजेगा भारत का नाम।।
वही आसमां वही फ़िज़ा है वही दिशाएं अभी तलक।
नयी चेतना नये जोश से नया सृजन होगा अविराम।।
बहुत रो लिये वर्तमान पर परिवर्तन की हो कोशिश।
सार्थक होगा तब विचार जब हालातों पर लगे लगाम।।
पिंजड़े के तोते भी रट के बातें अच्छी कर लेते।
बस बातों से बात न बनती करना होगा मिलकर काम।।
नित नूतन संकल्पों से नव सोच की धारा फूटेगी।
पत्थर पे भी सुमन खिलेंगे और होगा उपवन अभिराम।।
-श्यामल सुमन
जुमेरात...
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*-डॉ. फ़िरदौस ख़ान *
28 जनवरी, 2016... जुमेरात का दिन, एक यादगार दिन था... कभी न भूलने वाला
दिन... मुहब्बत की शिद्दत से सराबोर दिन, इबादत से लबरेज़ दिन, एक...
