फ़िरदौस ख़ान
विपक्ष में अकेले राहुल गांधी ही एक ऐसे नेता हैं, जो केंद्र की भारतीय जनता पार्टी सरकार की जनविरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद किए हुए हैं. वे एक ऐसे नेता हैं, जो दूसरों के दर्द को महसूस करते हैं, उनकी परेशानियों को समझते हैं. मामला नोटबंदी का हो या जीएसटी का हो, एनआरसी यानी नेशनल रजिस्टर ऑफ़ सिटिज़न बिल का हो या फिर काले कृषि क़ानूनों का हो, या कोरोना काल में जनता की बदहाली का हो. उन्होंने हमेशा ही ज़ुल्म के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद की है. बेरोज़गारी, दिनोंदिन बढ़ती महंगाई, देश की बर्बाद होती अर्थव्यवस्था और चीन के अतिक्रमण को लेकर भी वे केंद्र पर लगातार हमले कर रहे हैं. अब राहुल गांधी ने हिन्दू और हिन्दुत्व की व्याख्या कर हिंदुत्ववादियों के लिए बड़ा संकट पैदा कर दिया है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सत्ता हड़पने के लिए जो सियासी बिसात बिछाई थी, उस पर अब राहुल खुलकर खेल रहे हैं.    

ग़ौरतलब है कि कांग्रेस ने बढ़ती महंगाई के ख़िलाफ़ गुज़श्ता 12 दिसम्बर को जयपुर में महंगाई हटाओ महारैली का आयोजन किया. राहुल गांधी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि देश की हालत आप सबको दिख रही है. रैली महंगाई के बारे में है, बेरोज़गारी के बारे में है. जो आम जनता को दर्द हो रहा है, दुख हो रहा है, उसके बारे में है. देश की आज जो हालत है, शायद पहले कभी नहीं हुई. पूरा का पूरा धन चार-पांच पूंजीपतियों के हाथ में है. हिन्दुस्तान के सब इंस्टीट्यूशन, एक संगठन के हाथ में हैं. मंत्रियों के दफ़्तरों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक के ओएसडी हैं. देश को जनता नहीं चला रही है, बल्कि देश को तीन-चार पूंजीपति चला रहे हैं.


उन्होंने कहा कि नोटबंदी हुई, जीएसटी लागू की गई, तीन काले क़ानून बनाए गए और कोरोना के वक़्त आपने देश की जनता और देश की हालत देखी. मगर इन चीज़ों के बारे में बोलने से पहले मैं आज आपसे एक दूसरी बात कहना चाहता हूं. देश के सामने कौन सी लड़ाई है और लड़ाई किसके बीच में है, कौन सी विचारधाराओं के बीच में है. मैं आपको बताना चाहता हूं. फिर उसके बाद महंगाई, काले क़ानूनों के बारे में, बेरोज़गारी के बारे में खुलकर आपसे कहूंगा. आप जानते हो कि दो जीवों की एक आत्मा नहीं हो सकती. क्या दो जीवों की एक आत्मा हो सकती है? इसके जवाब में लोगों ने कहा कि नहीं हो सकती. जवाब सुनकर राहुल गांधी ने कहा कि वैसे ही दो शब्दों का एक मतलब नहीं हो सकता. दो जीवों की एक आत्मा नहीं हो सकती, दो शब्दों का एक अर्थ नहीं हो सकता. हर शब्द का अलग मतलब होता है. देश की राजनीति में आज दो शब्दों की टक्कर है, दो अलग शब्दों की, इनका अर्थ अलग है. एक शब्द हिन्दू, दूसरा शब्द हिन्दुत्ववादी. ये एक चीज़ नहीं है. ये दो अलग-अलग शब्द हैं और इनका अर्थ बिल्कुल अलग है. मैं हिन्दू हूं, मगर हिन्दुत्ववादी नहीं हूं. उन्होंने जन सैलाब की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि ये सब हिन्दू हैं, मगर हिन्दुत्ववादी नहीं हैं. पर आज मैं आपको हिन्दू और हिन्दुत्ववादी शब्द के बीच में फ़र्क़ बताना चाहता हूं.

उन्होंने आगे कहा कि महात्मा गांधी हिन्दू थे, जबकि गोडसे हिन्दुत्ववादी था. फ़र्क़ क्या होता है. फ़र्क़ मैं आपको बताता हूं. चाहे कुछ भी हो जाए, हिन्दू सत्य को खोजता है. भले ही वह मर जाए, कट जाए, पिस जाए, हिन्दू सच को ढूंढता है. उसका रास्ता सत्याग्रह होता है. पूरी ज़िन्दगी वह सच को ढूंढने में निकाल देता है. महात्मा गांधी ने ऑटोबायोग्राफ़ी लिखी- माई एक्सपेरियंस विद ट्रुथ, मतलब पूरी ज़िन्दगी उन्होंने सत्य को समझने के लिए, सच को ढूंढने के लिए बिता दी और अंत में एक हिन्दुत्ववादी ने उनकी छाती में तीन गोलियां मारीं. दूसरी तरफ़ एक हिन्दुत्ववादी अपनी पूरी ज़िन्दगी सत्ता को खोजने में लगा देता है. उसे सत्य से कुछ लेना-देना नहीं होता, उसे सिर्फ़ सत्ता चाहिए और सत्ता के लिए वह कुछ भी कर डालेगा. किसी को मार देगा, कुछ भी बोल देगा, जला देगा, काट देगा, पीट देगा, उसे सिर्फ़ सत्ता चाहिए. उसका रास्ता सत्याग्रह नहीं, उसका रास्ता सत्ताग्रह है.

उन्होंने कहा कि हिन्दू अपने डर का सामना करता है. हिन्दू खड़ा होकर अपने डर का सामना करता है, और एक इंच भी पीछे नहीं हटता है. वह शिवजी की तरह अपने डर को निगल जाता है, उसे पी लेता है. दूसरी तरफ़ एक हिन्दुत्ववादी अपने डर के सामने झुक जाता है. अपने डर के सामने वह मत्था टेकता है. हिन्दुत्ववादी को उसका डर डुबो देता है और इस डर से उसके दिल में नफ़रत पैदा होती है. यानी डर से नफ़रत पैदा होती है, ग़ुस्सा आता है, क्रोध आता है. हिन्दू डर का सामना करता है, उसके दिल में शान्ति होती है, उसके दिल में प्यार होता है, उसके दिल के अन्दर एक शक्ति होती है. ये हिन्दुत्ववादी और हिन्दू के बीच में मूल फ़र्क़ है.


मैंने ये सब आपको इसलिए बताया, क्योंकि आप सब हिन्दू हो, हिन्दुत्ववादी नहीं. और ये देश हिन्दुओं का देश है, हिन्दुत्ववादियों का नहीं. आज अगर इस देश में महंगाई है, दर्द है, दुख है, तो ये काम हिन्दुत्ववादियों ने किया है. हिन्दुत्ववादियों को किसी भी हालत में सत्ता चाहिए, वैसे ही ये कहते हैं कि मुझे सत्ता चाहिए, सच्चाई से मुझे कुछ लेना-देना नहीं. सच्चाई जाए भाड़ में. मुझे कुर्सी मिल जाए बस. और 2014 से इन लोगों का राज है, हिन्दुओं का राज नहीं. और हमें एक बार फिर इन हिन्दुत्ववादियों को सत्ता से बाहर निकालना है और एक बार फिर हिन्दुओं का राज लाना है. 

हिन्दू शब्द की परिभाषा बताते हुए राहुल गांधी ने कहा कि हिन्दू कौन- जो सबसे गले मिलता है. हिन्दू कौन- जो किसी से नहीं डरता है. हिन्दू कौन- जो हर धर्म का आदर करता है, वह हिन्दू है. आप हमारा कोई भी शास्त्र पढ़ लीजिए. रामायण पढ़िए, महाभारत पढ़िए, गीता पढ़िए, उपनिषद पढ़िए, मुझे दिखा दीजिए, कहां लिखा है कि किसी ग़रीब को मारना है? कहां लिखा है कि किसी कमज़ोर व्यक्ति को कुचलना है? कहां लिखा है? मुझे दिखा दो. कहीं नहीं लिखा. उन्होंने कहा कि गीता में लिखा है कि सत्य की लड़ाई लड़ो, मर जाओ, कट जाओ, लेकिन सत्य की लड़ाई लड़ो. गीता में कृष्णजी ने अर्जुन से ये नहीं कहा कि अपने भाइयों को सत्ता के लिए मारो. कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि अपने भाइयों को सच्चाई के लिए मारो. ये लड़ाई आज हिन्दुस्तान में चल रही है. ये झूठे हिन्दू एक तरफ़ हिन्दुत्ववादी हैं और दूसरी तरफ़ सच्चे हिन्दू यानी प्यार करने वाले हिन्दू, भाईचारे वाले हिन्दू, सभी धर्मों का आदर और सम्मान करने वाले हिन्दू.      

उन्होंने कहा कि अब मैं बताना चाहता हूं कि हुआ क्या, क्योंकि हमारी जनता को समझ ही नहीं आया कि हुआ क्या. छोटा सा उदाहरण है- आज हिन्दुस्तान की एक प्रतिशत आबादी के हाथ में हिन्दुस्तान का 33 प्रतिशत धन है. एक प्रतिशत आबादी के हाथ में 33 प्रतिशत धन. दस प्रतिशत आबादी के हाथ में 65 प्रतिशत धन और सबसे ग़रीब 50 प्रतिशत लोगों के हाथ में इस देश का सिर्फ़ छह प्रतिशत धन छोड़ा है. ये जादू कैसे किया? इस जादू को किसने किया, मैं आज आपको बताना चाहता हूं. औज़ार था- नोटबंदी, जीएसटी, किसान के ख़िलाफ़ तीन काले क़ानून.


उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी जी के आने से पहले हिन्दुस्तान का जो असंगठित सेक्टर था, छोटे दुकानदार, ग़रीब लोग, छोटी कम्पनी वाले, कुटीर उद्योग वाले, जो घर में अगरबत्ती बनाते थे, चप्पल बनाते थे, जूता बनाते थे, कपड़े सीते थे, किसान जो संगठित नहीं थे, मोदी जी के आने से पहले भारत की अर्थव्यवस्था में असंगठित क्षेत्र का हिस्सा 52 प्रतिशत हुआ करता था. नोटबंदी, जीएसटी, काले क़ानून और कोरोना के बाद असंगठित क्षेत्र का भाग 20 प्रतिशत तक रह गया है. उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान का 90 प्रतिशत तक फ़ायदा, 90 प्रतिशत प्रॉफ़िट, कॉरपोरेट प्रॉफ़िट 20 कम्पनियों को जाता है. उन्होंने वहां लगे एलसीडी टीवी की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि ये जो आप टीवी देख रहे हैं न, ये जो इस रैली में पांच मिनट के लिए दिखाएंगे, ये उनके ग़ुलाम हैं. ये हिन्दुत्ववादी नहीं हैं, ये हिन्दू हैं. मगर इन्हें दबाया गया गया है. हिंदुत्ववादियों ने इन बेचारों को दबा दिया है. मगर हिन्दू को नहीं दबाया जा सकता, कभी नहीं दबाया जा सकता. तीन हज़ार सालों में कभी ऐसा नहीं हुआ, आज भी नहीं हो सकता. क्योंकि हम डरते नहीं हैं. हम किसी से नहीं डरते. हम मरने से नहीं डरते. तो नरेंद्र मोदी जी और उनके तीन-चार उद्योगपतियों ने, हिन्दुत्ववादियों ने इस देश को सात सालों में बर्बाद कर दिया, ख़त्म कर दिया है, पिछले सात सालों में.

उन्होंने किसानों का ज़िक्र करते हुए कहा कि हमने क़र्ज़माफ़ी की. हम बात को समझे कि किसान को मदद करने की ज़रूरत है, क़र्ज़माफ़ी की ज़रूरत है. हर स्टेट में क़र्ज़माफ़ी की, क्योंकि हम जानते हैं कि किसान इस देश की हड्डी है, उसके बिना कुछ नहीं हो सकता. नरेंद्र मोदी जी ने किसानों की जो आत्मा है, उनका जो दिल है, उनकी छाती में चाक़ू मारा है. आगे से नहीं, बल्कि पीछे से मारा है. क्योंकि वह हिन्दुत्ववादी हैं. हिन्दू को अगर मारना भी पड़े, तो सामने से वार करता है, पीछे से नहीं. अगर वह हिन्दुत्ववादी है, तो पीछे से मारेगा, याद रखना. पहले पीछे से छुरा मारा और फिर कहते हैं, जाग हिन्दू. किसान हिन्दुत्ववादी के सामने खड़ा हुआ, तो हिन्दुत्ववादी ने कहा कि मैं माफ़ी मांगता हूं, मैं माफ़ी मांगता हूं.

उन्होंने कहा कि 700 किसान शहीद हुए. यहां हमने दो मिनट मौन रखा, पार्लियामेंट में मौन रखने नहीं दिया. मैंने कहा कि अगर आप नहीं करना चाहते, तो मैं खड़ा हो जाता हूं. विपक्ष के लोग दो मिनट के लिए मौन में खड़े हुए, लेकिन सरकार ने मौन नहीं रखा. पंजाब सरकार ने 400 शहीद किसानों के परिवारों को पांच लाख रुपये दिए हैं और उनमें से 152 किसानों के परिजनों को नौकरी भी दिलवा दी है और बाक़ी को हम नौकरी देने वाले हैं. हिन्दुस्तान की सरकार पार्लियामेंट में कहती है- हमें मालूम नहीं कि कौन से किसान मरे, हमारे पास लिस्ट ही नहीं है. कोई किसान शहीद हुआ ही नहीं, पार्लियामेंट में कहा था. हम कंपंसेशन कैसे दें, हमें तो मालूम ही नहीं है. मैंने पंजाब की लिस्ट ली, हरियाणा से 70-80 और नाम लिए, 500 लोगों की लिस्ट मैंने पार्लियामेंट में रखी और कहा- देखिए, पंजाब की सरकार ने मुआविज़ा दिया है, कंपंसेशन दिया है, आप भी दीजिए. पीछे से छुरा मारा, फिर माफ़ी मांगी और जब कंपंसेशन की बात आई, पांच लाख, 10 लाख, 25 लाख रुपये देने की बात आई, तो नरेंद्र मोदी जी नहीं दे सकते. क्योंकि वे कहते हैं कि वे किसान शहीद ही नहीं हुए. तो ये जो सोच है हिन्दुत्ववादियों की. चीन की सेना हिन्दुस्तान के अन्दर आ जाए, हज़ार किलोमीटर ले जाए, प्रधानमंत्री जी कहेंगे, देश के अन्दर कोई नहीं आया. और फिर डिफ़ेंस मिनिस्ट्री कहेगी कि चीन हमारे देश के अन्दर आ गया, चीन की सेना हमारे देश के अन्दर है.


उन्होंने कहा कि मैं थोड़ा और भी बताना चाहता हूं. 2014 में गैस सिलेंडर 414 रुपये का था, 2021 में 900 रुपये हो गया, यानी 117 प्रतिशत बढ़ोतरी. पेट्रोल 70 रुपये था, आज सौ रुपये है. डीज़ल 57 रुपये था, आज 90 रुपये है. चीनी 30 रुपये थी, आज 50 रुपये है. घी 300-350 रुपये लीटर था, आज 650 रुपये लीटर है. आटा 15 रुपये किलो था, आज 30 रुपये है. दाल 70 रुपये किलो थी, आज 190 रुपये है. अच्छे दिन आ गए हैं. आ गए अच्छे दिन? किसके- ‘हम दो, हमारे दो’ के. एयरपोर्ट देखो, पोर्ट देखो, कोल माइन देखो, टेलीफ़ोन देखो, सुपर मार्केट देखो. जहां भी देखो भैया, दो लोग दिखेंगे आपको- अडानी जी, अंबानी जी. उनकी ग़लती नहीं है. देखो भैया, अगर आपको कोई मुफ़्त में कुछ दे, आप क्या वापस दे दोगे- नहीं दोगे. उनकी ग़लती थोड़े ही है, ग़लती प्रधानमंत्री की है. सुबह उठते ही कहते हैं- भैया, आज अडानी-अंबानी को क्या दें? चलो भैया, आज एयरपोर्ट दे देते हैं. चलो भैया, आज किसानों के खेत दे देते हैं. चलो आज खनन दे देते हैं, माइन दे देते हैं. ऐसे देश नहीं चलाया जाता है. देश ग़रीबों का है, किसानों का है, मज़दूरों का है, छोटे दुकानदारों का है, स्मॉल मीडियम बिजनेस वालों का है, क्यों- क्योंकि यही लोग इस देश को रोज़गार दे सकते हैं. अंबानी जी की जगह है, अडानी जी की जगह है, मगर वे रोज़गार पैदा नहीं कर सकते. रोज़गार हमारा किसान पैदा करता है. रोज़गार छोटे व्यापारी पैदा करते हैं. छोटे दुकानदार पैदा करते हैं. छोटे बिजनेस वालों, मिडिल साइज़ बिजनेस वालों को तो इन्होंने ख़त्म ही कर दिया, मिटा दिया. एक प्रतिशत आबादी के पास 33 प्रतिशत धन, 10 प्रतिशत आबादी के पास 65 प्रतिशत धन और 50 प्रतिशत आबादी के पास केवल छह प्रतिशत धन. ये क्या हो रहा है? उन्होंने कहा कि हिन्दुस्तान को इस आक्रमण के ख़िलाफ़ खड़ा होना ही पड़ेगा और कोई रास्ता ही नहीं है और आप देखना, ये देश एक आवाज़ से खड़ा होगा. राजस्थान एक आवाज़ से खड़ा होगा और नरेंद्र मोदी जी को बाहर का रास्ता दिखाएगा. 

उन्होंने कहा कि कोरोना हुआ, मैंने अपनी आंखों से देखा. बाक़ी देशों ने अपने लोगों की जेब में पैसा डाला, मदद की, मगर नरेंद्र मोदी जी ने 5-10 बड़े उद्योगपतियों का टैक्स माफ़ किया, उनकी जेब में पैसा डाला और मज़दूरों को ट्रेन तो छोड़ो, बस भी नहीं दी, वे हज़ारों किलोमीटर पैदल चले. 100-200 लोग तो सड़कों पर ही मर गए. नरेंद्र मोदी जी ने कहा- थाली बजाओ, ताली बजाओ, मोबाइल फ़ोन की लाइट जलाओ, मर जाओ.


उन्होंने कहा कि अब रोज़गार की बात करते हैं, पर आज 60 साल से सबसे ज़्यादा बेरोज़गारी हिन्दुस्तान में है. क्यों- क्योंकि आपने रोज़गार देने वाली रीढ़ की हड्डी तोड़ दी. आपने डिमोनेटाइज़ेशन किया, जीएसटी की. नोटबंदी, कोरोना में आपने छोटे बिजनेस वालों को समर्थन नहीं दिया, सब ख़त्म हो गया. रोज़गार कहां से पैदा होगा? रोज़गार दो-तीन उद्योगपति नहीं पैदा कर सकते. रोज़गार लाखों दुकानदार, लाखों छोटे बिजनेस वाले, मिडिल साइज़ बिजनेस वाले, करोड़ों किसान पैदा करते हैं. ये सच्चाई है देश की. देश को यह सच्चाई पहचाननी पड़ेगी, और कोई रास्ता नहीं है. मैं आपसे झूठ नहीं बोलने वाला, मैं हिन्दुत्ववादी नहीं हूं, मैं हिन्दू हूं. मैं डरता नहीं, सत्ता मिले न मिले, कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, मैं सच्चाई के रास्ते से नहीं हटने वाला. मगर सच्चाई देश को पहचाननी पड़ेगी.       


उन्होंने चीन का ज़िक्र करते हुए कहा कि चीन ने अरुणाचल में, लद्दाख़ में हमारी ज़मीन ली है. मोदी जी कह रहे हैं कि कुछ नहीं हुआ. 700 किसान शहीद हुए, मोदी जी कहते हैं कि कुछ नहीं हुआ. बहुत कुछ हुआ है. बहुत लोगों को चोट लगी है. बहुत लोगों की जानें गई हैं. बहुत दुख हुआ है और अब देश को आगे बढ़ना पड़ेगा और ये देश एक साथ मिलकर आगे बढ़ेगा.
   
प्रियंका गांधी ने भी जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार की नीतियों की निन्दा की. उन्होंने कहा कि मैं ऐसे लोगों से मिलकर आई हूं, जिनके परिजनों को इस सरकार के मंत्री के बेटे ने कुचलकर मार दिया। हमारे बेटों के हत्यारों के साथ पीएम मंच साझा करते हैं. ये सरकार जनता की भलाई नहीं चाहती. ये आपके लिए काम नहीं कर रही है. किसके लिए काम कर रही है? ये सरकार कुछ गिने-चुने लोगों के लिए ही काम कर रही है.

इस रैली में सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे, केसी वेणु गोपाल, पवन बंसल, अजय माकन, अशोक गहलोत, भूपेश बघेल, चरणजीत सिंह चन्नी, अधीर रंजन चौधरी, गोविन्द सिंह डोटासरा, सचिन पायलट आदि ने शिरकत की. कांग्रेस नेताओं ने केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों का कड़े शब्दों में निंदा करते हुए जनमानस से कांग्रेस के लिए समर्थन मांगा. 

क़ाबिले ग़ौर है कि भारतीय जनता पार्टी हमेशा से ही जनमानस के मुद्दों को दरकिनार करते हुए सांप्रदायिक भावनाएं भड़का कर चुनाव लड़ती आई है. अब राहुल गांधी ने भाजपा को उसी की बिछाई बिसात पर हर तरफ़ से घेर लिया है. देखना दिलचस्प होगा कि अब भाजपा इसका कैसे मुक़ाबला करती है.         
(लेखिका स्टार न्यूज़ एजेंसी में संपादक हैं)


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