डॉ फ़िरदौस ख़ान
दुनिया में ऐसा कोई भी मर्ज़ नहीं है, जिसका इलाज न हो. मुख़तलिफ़ हदीसों से ये बात साबित है. इसलिए किसी भी मर्ज़ में मुब्तिला होने पर उसके इलाज पर ख़ास तवज्जो देनी चाहिए.
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "बेशक अल्लाह तआला ने बीमारी और उसकी दवा दोनों नाज़िल फ़रमाई हैं. और हर बीमारी के लिए दवा बनाई है. लिहाज़ा इलाज करो, लेकिन हराम चीज़ से इलाज न करो."
(सुनन अबी दाउद 3874)
अल्लाह के महबूब और हमारे प्यारे आक़ा हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "अल्लाह तआला ने कोई बीमारी ऐसी नाज़िल नहीं की, जिसके लिए उसने शिफ़ा नाज़िल न फ़रमाई हो."
(सही बुख़ारी 5678)
चित्र गूगल से साभार
