भाजपा !
देखो, कहीं, किसी कोने में, अखबारों में नाम छपा ??
कांग्रेस !
एक्सप्रेस है, लोगे रेस ??
विपक्ष ने मांगी सफाई !
कहा पक्ष ने,"आप कहीं भी, इसको कर सकते हैं, भाई !!"
दो स्तरीय वार्ता !
जनता को क्या बतलायेंगे, कि उसमें क्या सार था ??
वायुयान !
बिना किसी टक्कर के अब तो, भरता ही वो नहीं उड़ान !!
अभियान !
महंगाई में नहीं ज़रुरत, अन्दर सब पहनें बनियान !!
टकराव !
इसके बाद इसी मुद्दे पर, पैदा करवाएं सदभाव !!
झटके !
है तबादला-प्रेमी सी. एम., जाने कहां उठाकर पटके ??
आरक्षण !
है चुनाव से पहले, सबको देने का प्रण !!
धरना !
धरना देने के विरोध में, काम वही अबकी से करना !!
आशंका !
लंका का बीमा करवाकर, रावण ना फुंकवा दे लंका !!
-अतुल मिश्र
अम्मी से हालात का मुक़ाबला करना सीखा
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अम्मी जान कहा करती हैं कि इंसान को कभी बुज़दिल नहीं होना चाहिए. बचपन में
बिजली चली जाती और अंधेरे में हमें दूसरे कमरे में जाने में ख़ौफ़ आता, तो अम्मी
कहती...
