ग़ज़ल
ज़िन्दगी का उधार है हम पर,
सच तो यह है कि भार है हम पर,
ज़िन्दगी का पता नहीं लेकिन,
मौत को ऐतबार है हम पर !
दर्द तो बेहिसाब है, लेकिन,
बस, ज़रा सा करार है हम पर !
आइना सामने दिखाने से,
सख्त नाराज़ यार है हम पर !
इश्क में आह भी नहीं होती,
जाने कैसा बुखार है हम पर ?
अर्सों पहले जो नज़रे-मय पी थी,
आज तक भी खुमार है हम पर !
हम उसे सिर्फ एक पल देखें,
जिसका जादू सवार है हम पर !
-अतुल मिश्र
अम्मी से हालात का मुक़ाबला करना सीखा
-
अम्मी जान कहा करती हैं कि इंसान को कभी बुज़दिल नहीं होना चाहिए. बचपन में
बिजली चली जाती और अंधेरे में हमें दूसरे कमरे में जाने में ख़ौफ़ आता, तो अम्मी
कहती...
