स्टार न्यूज़ एजेंसी
नई दिल्ली. चिकित्सा शोध में यह सु निशिचत हो गया है कि हृदय बीमारी भी पुरुष और महिलाओं में बहुत सारे तथ्य ऐसे होते हैं जो एक-दूसरे से मिलते हैं. हार्ट केयर फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल के मुताबिक. कुछ महत्वपूर्ण फर्क भी हैं जो हार्वर्ड न्यूज लेटर में प्रकाशित हुए हैं.
धूम्रपान : सिगरेट पीने की जीवन शैली सबसे ऊपर है जो पुरुष और महिलाओं दोनों के लिए आशंकित तथ्य है, लेकिन जो महिलाएं गर्भ निरोधक दवाएं लेती हैं, उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा कहीं ज्यादा रहता है.
कोलेस्ट्रॉल : 'बैड' एलडीएल कोलेस्ट्रॉल स्तर 130 एमजी/डीएल से अधिक होना पुरुषों के लिए एक बड़ा खतरा है, जबकि महिलाओं में 'गुड' एचडीएल कोलेस्ट्रॉल 50 एमजी/डीएल से कम होने को खतरे का बड़ा सूचक माना जाता है. महिलाओं में उच्च ट्राइग्लाइसराइड स्तर 150 एमजी/डीएल से अधिक होने को भी खतरे का सूचक माना जाता है.
उच्च ब्लड प्रेशर : 45 साल की उम्र तक उच्च ब्लड प्रेशर के मामले पुरुषों के महिलाओं से अधिक होते हैं, लेकिन मध्य उम्र के बाद महिलाओं की तादाद बढ़ने लगती है और उच्च रक्तचाप के मामले में 70 की उम्र तक औसतन महिलाओं की तादाद पुरुषों से ज्यादा हो जाती है.
शारीरिक गतिविधि न करना : करीब 30 फीसदी अमेरिकी ही किसी नियमित शारीरिक गतिविधि में शामिल होते हैं, लेकिन पुरुष, महिलाओं की तुलना में ज्यादा सक्रिय रहते हैं और यह फर्क कम उम्र के लोगों (18 से 30 साल के) और बूढ़े (65 या इससे अधिक उम्र के) लोगों में बहुत ज्यादा है.
अत्यधिक वज़न : अत्यधिक वज़न को लेकर यह माना जाता है कि इससे हृदय बीमारी होती है, लेकिन वज़न के लगातार बढ़ते रहने से यह तादाद कहीं ज्यादा तेज गति से बढ़ती है. कमर का मोटापा जिससे इंसुलिन की गतिविधि पर असर होता है और बैड कोलेस्ट्रॉल निकलता है, वह कहीं ज्यादा घातक होता है बनिस्बत कूल्हों में अतिरिक्त फैट के. कई स्वास्थ संस्थाओं ने उनके बॉडी मास इंडेक्स की तुलना में कमर की चौड़ाई को महिलाओं के लिए 35 इंच या इससे अधिक और और पुरुषों के लिए 40 इंच या इससे अधिक को हृदय बीमारी का सूचक माना है.
मधुमेह : पुरुष और महिलाओं दोनों में ही मधुमेह से हृदय बीमारी का खतरा दोगुना बढ़ जाता है. हालांकि मधुमेह रोगी महिलाओं में कार्डिएक डेथ का खतरा दोगुना रहता है, जबकि पुरुषों में यह 60 फीसदी बढ़ जाता है.
मेटाबॉलिक सिंड्रोम : इन पांच मे से तीन लक्षण मेटाबॉलिक सिंड्रोम के होते हैं- कमर का मोटापा, उच्च रक्तचाप, उच्च ट्राइग्लाइसराइड, एचडीएल कोलेस्ट्रॉल में कमी और उच्च ब्लड षुगर या इंसुलिन रुकावट से महिलाओं को पुरुशों से ज्यादा खतरा रहता है और इससे हार्ट अटैक से मौत का खतरा तीन गुना बढ़ जाता है साथ ही मधुमेह होने का खतरा 10 गुना बढ़ जाता है. खासकर कमर की चौड़ाई और उच्च ट्राइग्लाइसराइड दोनों एक साथ होने पर महिलाओं के लिए कहीं ज्यादा घातक होता है।
मनोवैज्ञानिक आशंकित तथ्य : दिल और सिर के बीच का संबंध आज भी स्पष्ट नहीं है, लेकिन कई ऐसे प्रमाण मौजूद हैं जिनसे साबित होता है कि सोच के चलते भी हृदय बीमारी होती है जैसे कि क्रोनिक स्ट्रेस, अवसाद और सामाजिक सहयोग न मिलना। इसमें पुरुष या महिला ज्यादा मायने नहीं रखता, लेकिन शोध में दर्शाया गया है कि कुछ तथ्यों का असर पुरुषों और महिलाओं में भिन्न होता है.
तनाव समान तरीके का बोझ है। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में भावनात्मक लगाव के चलते दोगुना ज्यादा अवसाद की स्थिति होती है। 'ब्रोकेन हार्ट सिंड्रोम' के दर्ज किये गए मामलों में अकस्मात, लेकिन धीरे-धीरे उसमें उल्टाव के मालों में भावनात्मक अनुभवों के बाद हार्ट फंक्षन में कमी दर्ज की गई और ऐसा अधिकतर बूढ़ी महिलाओं में देखा गया। गुस्सा और झगड़ा पुरुषों में लंबे समय तक असर दिखाता है, लेकिन संभवत: ऐसा इसलिए होता है क्योंकि अधिकतर हृदय बीमारी के अध्ययनों में इस विषय पर महिलाओं को छोड़ दिया जाता है. यह भी सच है कि पुरुषों को समाज से उतना सहयोग नहीं मिलता है जितना महिलाओं को खासकर रिटायरमेंट की उम्र के बाद.
इनफ्लेमेशन : क्रोनिक इनफ्लेमेशन को अब अथीरोस्लेरोटिक प्लेक के जमाव की स्थिति के लिए जाना जाता है. महिलाओं में यह स्थिति ज्यादा होती है और लगातार इसकी स्थिति बने रहने से लो ग्रेड इनफ्लेमेशन की शिकार होती हैं. उदाहरण के तौर पर ल्यूपस से हार्ट अटैक ओर स्ट्रोक का खतरा महिलाओं में दो गुना बढ़ जाता है.