चांदनी
नई दिल्ली. जो लोग नियमित तौर पर कई तरह के व्यायाम करते हैं उनमें एक समय के बाद डिप्रेशन या एंजाइटी डिसऑर्डर का खतरा कम हो जाता है।

हार्ट केयर फाउंडेशन   ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ. के के अग्रवाल  ने अमेरिकन जर्नल ऑफ एपिडमियोलॉजी में प्रकाशित एक ब्रिटिश अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि सामान्य तौर पर पुरुष नियमित तौर पर कई तरह के व्यायाम करते हैं जैसे कि दौड़ना, फुटबॉल खेलना- इनमें से खेलने वालों में करीब एक चौथाई लोग कम सक्रिय होते हैं जिसमें डिप्रेशन या एंजाइटी का खतरा अगले पांच सालों में होता है।

हां तक कि हल्की-फुल्की एक्सरसाइज से भी कई फायदे उठाए जा सकते है। यह खुलासा जर्नल ऑफ द अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के अध्ययन में किया गया है जिसमें लुइसियाना स्टेट यूनिर्सिटी सिस्टम के डॉ. तिमोथी चर्च ने दिखाया है कि हल्की-फुल्की एक्सरसाइज यानी करीब एक हफ्ते में 75 मिनट खर्च करके बैठकर जिंदगी बिताने वाले लोग अत्यधिक वज़न के व्यक्ति कार्डियो रेसपाइरेटरी फिटनेस स्तर को बढ़ा सकते हैं।

इस अध्ययन पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए डॉ. के के अग्रवाल ने कहा कि जब इस तरह की एक्सरसाइज के स्तर में कमी हो जाती है तो इससे वज़न में कमी लाने की सलाह दी जाती है, वर्तमान शोध के मुताबिक ऐसे लोगों में एक्सरसाइज के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए जो लोग व्यायाम नहीं करते हैं और उन्हें तुरंत व्यायाम करना शुरू कर देना चाहिए।

फिटनेस में बेहतरी का संबंध हृदय संबंधी बीमारी के खतरे और मौत में कमी से है। नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ हेल्थ कनसेंसस डेवलपमेंट पैनल ने सुझाव दिया है कि कम से कम 30 मिनट की मध्यम स्तर की शारीरिक गतिविधि हफ्ते के अधिकतर दिनों में करें। रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि वज़न बढ़ने पर काबू पाने के लिए जरूरी हो तो रोजाना 60 मिनट तक व्यायाम किया जाना चाहिए।


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