सरफ़राज़ ख़ान
स्टार न्यूज़ एजेंसी की सम्पादक फ़िरदौस एवं युवा पत्रकार फ़िरदौस ख़ान ने वंदे मातरम का पंजाबी में अनुवाद किया है. वंदे मातरम भारत का राष्ट्रीय गीत है. इसकी रचना बंकिमचंद्र चटर्जी ने की थी. अरबिंदो घोष ने इस गीत का अंग्रेज़ी में और वरिष्ठ साहित्यकार मदनलाल वर्मा क्रांत ने वंदे हिन्दी में अनुवाद किया था. भाजपा नेता आरिफ़ मोहम्मद ख़ान ने इसका उर्दू में अनुवाद किया. गीत के प्रथम दो पद संस्कृत में तथा शेष पद बांग्ला में हैं. राष्ट्रकवि रबींद्रनाथ ठाकुर ने इस गीत को स्वरबद्ध किया था. भारत में पहले अंतरे के साथ इसे सरकारी गीत के रूप में मान्यता मिली है. इसे राष्ट्रीय गीत का दर्जा कर इसकी धुन और गीत की अवधि तक संविधान सभा द्वारा तय की गई है, जो 52 सेकेंड है.
वंदे मातरम का पंजाबी अनुवाद
ਮਾਂ ਤੈਨੂੰ ਸਲਾਮ
ਤੂੰ ਭਰੀ ਹੈ ਮਿੱਠੇ ਪਾਣੀ ਨਾਲ਼
ਫਲ ਫੁੱਲਾਂ ਦੀ ਮਹਿਕ ਸੁਹਾਣੀ ਨਾਲ਼
ਦੱਖਣ ਦੀਆਂ ਸਰਦ ਹਵਾਵਾਂ ਨਾਲ਼
ਫ਼ਸਲਾਂ ਦੀਆਂ ਸੋਹਣੀਆਂ ਫ਼ਿਜ਼ਾਵਾਂ ਨਾਲ਼
ਮਾਂ ਤੈਨੂੰ ਸਲਾਮ…
ਤੇਰੀਆਂ ਰਾਤਾਂ ਚਾਨਣ ਭਰੀਆਂ ਨੇ
ਤੇਰੀ ਰੌਣਕ ਪੈਲ਼ੀਆਂ ਹਰੀਆਂ ਨੇ
ਤੇਰਾ ਪਿਆਰ ਭਿੱਜਿਆ ਹਾਸਾ ਹੈ
ਤੇਰੀ ਬੋਲੀ ਜਿਵੇਂ ਪਤਾਸ਼ਾ ਹੈ
ਤੇਰੀ ਗੋਦ 'ਚ ਮੇਰਾ ਦਿਲਾਸਾ ਹੈ
ਤੇਰੇ ਪੈਰੀਂ ਸੁਰਗ ਦਾ ਵਾਸਾ ਹੈ
ਮਾਂ ਤੈਨੂੰ ਸਲਾਮ…
-ਫ਼ਿਰਦੌਸ ਖ਼ਾਨ
मातरम का पंजाबी अनुवाद (देवनागरी में)
मां तैनूं सलाम
तूं भरी है मिठ्ठे पाणी नाल
फल फुल्लां दी महिक सुहाणी नाल
दक्खण दीआं सरद हवावां नाल
फ़सलां दीआं सोहणिआं फ़िज़ावां नाल
मां तैनूं सलाम...
तेरी रौणक पैलीआं हरीआं ने
तेरा पिआर भिजिआ हासा है
तेरी बोली जिवें पताशा है
तेरी गोद ’च मेरा दिलासा है
तरी पैरीं सुरग दा वासा है
मां तैनूं सलाम...
-फ़िरदौस ख़ान
वंदे मातरम का पंजाबी अनुवाद (रोमन में)
Ma tainu salam
Tu bhri hain mithe pani naal
Phal phulaan di mahik suhaani naal
Dakhan dian sard hawawaan naal
Faslan dian sohnia fizawan naal
Ma tainu salam...
Tarian raatan chanan bharian ne
Teri raunak faslan harian ne
Tera pyaar bhijia hasa hai
Teri boli jiven patasha hai
Teri god 'ch mera dilaasa hai
Tere pairin surg da vasa hai
Ma tainu salam...
-Firdaus Khan
फ़िरदौस ख़ान एक इस्लामी विद्वान, शायरा, कहानीकार, निबंधकार, पत्रकार, सम्पादक और अनुवादक हैं। उन्हें फ़िरदौस ख़ान को लफ़्ज़ों के जज़ीरे की शहज़ादी के नाम से जाना जाता है। वे उर्दू, हिन्दी, अंग्रेज़ी, पंजाबी और अरबी सहित कई भाषाओं की जानकार हैं।
उत्कृष्ट पत्रकारिता, कुशल सम्पादन और श्रेष्ठ लेखन के लिए उन्हें अनेक पुरस्कारों ने नवाज़ा जा चुका है. उन्हें डॉक्टर ऑफ़ फ़िलॉसफ़ी की मानद उपाधि से भी सम्मानित किया गया है। वे मुशायरों और कवि सम्मेलनों में भी शिरकत करती रही हैं। कई बरसों तक उन्होंने हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत की तालीम भी ली. वे उर्दू, हिन्दी, पंजाबी और इंग्लिश में लिखती हैं. वे मासिक पैग़ामे-मादरे-वतन की सम्पादक और मासिक वंचित जनता में सम्पादकीय सलाहकार भी रही हैं। 'स्टार न्यूज़ एजेंसी' और 'स्टार वेब मीडिया' नाम से उनके दो न्यूज़ पॉर्टल भी हैं।
उन्होंने दूरदर्शन केन्द्र, आकाशवाणी और देश के प्रतिष्ठित समाचार-पत्रों व पत्रिकाओं में कई वर्षों तक काम किया है। उन्होंने अनेक साप्ताहिक समाचार-पत्रों और पत्रिकाओं का सम्पादन भी किया है। वे दूरदर्शन केन्द्र और आकाशवाणी की प्रख्यात प्रसारक, दूरदर्शन केन्द्र के समाचार अनुभाग की प्रख्यात सम्पादक और आकाशवाणी की प्रसिद्ध कम्पेयर रही हैं। इसके अलावा उन्होंने कई समाचार चैनलों में भी अपनी प्रतिभा का योगदान दिया है। उन्होंने कई वृत्तचित्र, टेलीविज़न नाटक और रेडियो नाटक भी लिखे हैं। वे देश-विदेश के विभिन्न समाचार-पत्रों, पत्रिकाओं, पुस्तकों, समाचार और फ़ीचर एजेंसियों के लिए लिखती हैं।
वे रूहानियत में यक़ीन रखती हैं। उन्होंने फ़हम अल क़ुरआन लिखा है। ये उनकी ज़िन्दगी का शाहकार है, जो इंशा अल्लाह रहती दुनिया तक लोगों को अल्लाह के पैग़ाम से रूबरू करवाता रहेगा। वे सूफ़ी सिलसिले से जुड़ी हैं। उन्होंने सूफ़ी-संतों के जीवन दर्शन पर आधारित एक किताब 'गंगा-जमुनी संस्कृति के अग्रदूत' लिखी है, जिसे साल 2009 में प्रभात प्रकाशन समूह के ‘ज्ञान गंगा’ ने प्रकाशित किया था। वे अपनी अम्मी मरहूमा ख़ुशनूदी ख़ान उर्फ़ चांदनी ख़ान को अपना पहला मुर्शिद और अपने अब्बू मरहूम सत्तार अहमद ख़ान को अपना दूसरा मुर्शिद मानती हैं।
वे कहती हैं कि हमारी ज़िन्दगी का मक़सद ख़ुदा की रज़ा हासिल करना है। हमारा काम इसी मंज़िल तक पहुंचने का रास्ता है, इसी क़वायद का एक हिस्सा है। कायनात की फ़ानी चीज़ों में हमें न पहले कभी दिलचस्पी थी और न आज है और कभी होगी। फ़हम अल क़ुरआन लिखते वक़्त हमें इस बात का अहसास हुआ कि हमने अपनी ज़िन्दगी फ़ानी चीज़ों के लिए ज़ाया नहीं की। बचपन से ही हमारी दिलचस्पी इबादत और रूहानी इल्म हासिल करने में ही रही है।
वे बलॉग भी लिखती हैं। उनके कई बलॉग हैं। फ़िरदौस डायरी और मेरी डायरी उनके हिंदी के बलॉग है। हीर पंजाबी का बलॉग है। जहांनुमा उर्दू का बलॉग है और द प्रिंसिस ऑफ़ वर्ड्स अंग्रेज़ी का बलॉग है। राहे-हक़ उनका रूहानी तहरीरों का बलॉग है। उन्होंने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम का पंजाबी अनुवाद किया है।
उनकी शायरी किसी को भी अपना मुरीद बना लेने की तासीर रखती है। मगर जब वे हालात पर तब्सिरा करती हैं, तो उनकी क़लम तलवार से भी ज़्यादा तेज़ हो जाती है। जहां उनकी शायरी में इबादत, इश्क़, समर्पण, रूहानियत और पाकीज़गी है, वहीं उनके लेखों में ज्वलंत सवाल मिलते है, जो पाठक को सोचने पर मजबूर कर देते हैं। अपने बारे में वे कहती हैं-
नफ़रत, जलन, अदावत दिल में नहीं है मेरे
अख़लाक़ के सांचे में अल्लाह ने ढाला है…
वे ये भी कहती हैं-
मेरे अल्फ़ाज़, मेरे जज़्बात और मेरे ख़्यालात की तर्जुमानी करते हैं, क्योंकि मेरे लफ़्ज़ ही मेरी पहचान हैं...
