विनय अंजू कुमार
रहस्य रोमांच की कहानियाँ या उपन्यास मैंने बहुत कम पढ़ा है, लेकिन किश्वर अंजुम जी का कहानी संग्रह “परछाइयाँ अंधेरों की” दो दिन पहले मँगवाया था और आज पढ़कर समाप्त किया. मैंने पहले भी किश्वर जी को पढ़ा है और इनकी भाषा मुझे बहुत प्रभावित करती है, ख़ासकर इनके द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले उर्दू ज़बान के शब्द. वैसे मुझे जाती तौर पर पारलौकिक ताक़तों या मृत्योपरांत जीवन में कोई यक़ीन नहीं होता है लेकिन कहानियाँ तो कल्पना की उड़ान ही होती हैं और इन कहानियों को भी इसी नज़रिए से मैंने पढ़ा.
संग्रह में कुल 15 कहानियाँ हैं और सब रहस्य, रोमांच से भरपूर हैं. हम लोगों ने भी अपने बचपन से लेकर आज तक तमाम ऐसे क़िस्से सुने हैं जिनपे यक़ीन नहीं होता है लेकिन चूँकि उनका कोई तात्कालिक उत्तर नहीं होता तो ऐसे क़िस्से चकित कर देते हैं. बहरहाल अगर कहानियों की बात करें तो पहली कहानी “संयोग” सच्चाई के क़रीब है क्योंकि ऐसा संयोग बहुतेरे लोगों के साथ घटता है. दूसरी कहानी “पच्चीस कलदार” हमको पुराने समय में ले जाती है और बहुत कमाल की कल्पना है इसमें. “चिड़िया” बहुत भावपूर्ण कहानी है और माँ की बच्चों के लिए ममता का सजीव चित्रण करती है. “मैकी मास्टर” ने भी बहुत प्रभावित किया और अंत ने चकित कर दिया. “पोस्टमार्टम” पढ़कर मन अजीब सा हो गया और “केर घाटी” बहुत दिलचस्प लगी और कुछ क़िस्से हमें भी याद आ गए.
“कोयला” और “दामिश एक इफरीत” अलग स्तर की कहानियाँ हैं जिसके बारे में मैंने कभी सोचा भी नहीं था. “बू”, “लौ”, “आग” सभी कहानियों में रहस्य भी है और रोमांच भी. कुल मिलाकर बहुत बेहतरीन किस्सागोई है इन कहानियों में और भाषा शैली के चलते पढ़ने का आनंद दोगुना हो जाता है.
आ किश्वर जी को बहुत बहुत बधाई इस कहानी संग्रह के लिए और भविष्य के लिए शुभकामनाएँ. ख़ैर किस्सा मुख्तसर यह है कि अगर आपकी दिलचस्पी रूहानी ताक़तों, रहस्य रोमांच में है तो यकीनन यह किताब आपको मुसलसल तौर पर बहुत पसंद आएगी.
संग्रह शुभदा बुक्स ने प्रकाशित किया है
