एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी
यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
कितनी सौंधी लगती है तब मांझी की रुसवाई भी
दो-दो शक्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में
मेरे साथ चला आया है आप का इक सौदाई भी
खामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी खामोशी है
उन की बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी
-गुलज़ार
प्रेरणादायी उपन्यास है रॉबिन्सन क्रूसो
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*-सरफ़राज़ ख़ान *हाल ही में अंग्रेज़ी के प्रथम उपन्यास ‘रॉबिन्सन क्रूसो’ का
हिन्दी में भावानुवाद पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ। यह भावानुवाद सुप्रसिद्ध
कवि, ...
