एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी
ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी
यादों की बौछारों से जब पलकें भीगने लगती हैं
कितनी सौंधी लगती है तब मांझी की रुसवाई भी
दो-दो शक्लें दिखती हैं इस बहके से आईने में
मेरे साथ चला आया है आप का इक सौदाई भी
खामोशी का हासिल भी इक लम्बी सी खामोशी है
उन की बात सुनी भी हमने अपनी बात सुनाई भी
-गुलज़ार
ज़िन्दगी
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कहते हैं कि ज़िन्दगी कभी किसी के लिए नहीं रुकती... लेकिन हक़ीक़त में ऐसा नहीं
है, ज़ाहिरी तौर पर भले ही ज़िन्दगी मुतासिर दिखाई न दे, लेकिन हक़ीक़ी तौर पर
ज़िन्दग...
