सुसाइड नोट

Posted Star News Agency Wednesday, June 24, 2015 ,


फ़िरदौस ख़ान
लड़की बहुत मज़लूम थी. उसकी ज़िन्दगी में ऐसा कोई नहीं था, जिसे वह अपना कह सके. मां-बाप भी सारी उम्र नहीं बैठे रहते. और भाई, भाई भी तब तक ही भाई होते हैं, जब तक उनकी शादी नहीं हो जाती. शादी के बाद वो सिर्फ़ अपनी बीवी के ही बनकर रह जाते हैं. शादी के बाद वो अपने मां-बाप को नहीं पूछते, फिर बहन क्या चीज़ है.
लड़की अपनी ज़िन्दगी के अकेलेपन से परेशान थी. उसकी तकलीफ़ को समझने वाला कोई नहीं था. कोई ऐसा नहीं था, जिससे पल-दो-पल बात करके वो अपना दिल हल्का कर सके. उसकी ज़िन्दगी अज़ाब बनकर रह गई थी. आख़िर कब तक वो इस अज़ाब को झेलती. उसने फ़ैसला किया कि जब तक हिम्मत है, तब तक वो ज़िन्दगी के बोझ को अपने कंधों पर ढोएगी और जब हिम्मत जवाब दे देगी, तो इस बोझ को उतार फेंकेगी... और एक दिन उसने ऐसा ही किया. उसने ख़ुदकुशी कर ली.
ख़ुद्कुशी करने से पहले उसने बहुत सोचा, दुनिया के बारे में, रिश्तेदारों के बारे में और उन बातों के बारे में, जिनमें कहा जाता है कि ख़ुदकुशी करना जुर्म है, गुनाह है.
वो सोचती है, कोई जिये या मरे, इससे दुनिया को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता. रिश्तेदारों का क्या है, जब कभी जीते जी उसकी ख़बर न ली, मरने के बाद क्या याद करेंगे. और जुर्म, क़ानून भी अब उसका क्या कर लेगा. क़ानून भी उन हालात को नहीं रोकता, जो जुर्म की वजह बनते हैं. वो तो बस आंखें मूंदकर जुर्म होने का इंतज़ार करता है. गुनाह, उसका क्या. कहते हैं कि गॊड की मर्ज़ी के बिना एक पत्ता तक नहीं हिलता. हर चीज़ पर वो क़ादिर है, हर चीज़ उसी के अख़्तियार में है. मौत का फ़रिश्ता भी उसी की इजाज़त से ही रूह क़ब्ज़ करता है. किसकी मौत कब, कहां, कैसे होनी है, ये पहले से ही तय होता है. यानी उसकी मौत इसी तरह लिखी है, यानी ख़ुदकुशी. ये सोचकर उसके दिल से एक बोझ उतर जाता है, गुनाह का बोझ. वो सोचती है कि शायद उसकी मौत इसी तरह लिखी है, तभी ये हालात पैदा हुए कि ज़िन्दगी से बेपनाह मुहब्बत करने वाली एक लड़की आज इस तरह मौत की आग़ोश में सो जाना चाहती है.
अब उसे सबसे ज़रूरी काम करना था, आख़िरी काम. उसने अपनी डायरी उठाई और आख़िरी तहरीर लिखने बैठ गई. उसे सुसाइड नोट लिखना था. उसने लिखा-
"आज मैंने अपने पूरे होशो-हवास में अपनी मर्ज़ी से ज़िन्दगी के बोझ को अपने कंधों से उतार फेंका है."
इसके बाद उसने बहुत-सी नींद की गोलियां खा लीं और अपनी डायरी को अपने सीने से लगाकर लेट गई. ये डायरी ही बस उसकी अपनी थी, उसके अकेलेपन में उसका सबसे बड़ा सहारा थी, जिसमें वो अपने दिल की बातें लिखा करती थी. अपने उन ख़्वाबों के बारे में लिखा करती थी, जो कभी उसने देखे थे. अपने घरबार के ख़्वाब, ज़िन्दगी को भरपूर जीने के सतरंगी ख़्वाब. वो इतनी ख़ुशनसीब नहीं थी कि उसके ख़्वाब पूरे होते. उसने कौन-सी ख़ुदायी मांगी थी, बस एक अपना घर ही तो चाहा था. उसे वो भी नसीब नहीं हुआ.
(कहानी)

तस्वीर गूगल से साभार


أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ

أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ
I Love Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam

फ़िरदौस ख़ान का फ़हम अल क़ुरआन पढ़ने के लिए तस्वीर पर क्लिक करें

या हुसैन

या हुसैन

फ़िरदौस ख़ान की क़लम से

Star Web Media

सत्तार अहमद ख़ान

सत्तार अहमद ख़ान
संस्थापक- स्टार न्यूज़ एजेंसी

ई-अख़बार पढ़ें

ब्लॉग

  • जुमेरात... - *-डॉ. फ़िरदौस ख़ान * 28 जनवरी, 2016... जुमेरात का दिन, एक यादगार दिन था... कभी न भूलने वाला दिन... मुहब्बत की शिद्दत से सराबोर दिन, इबादत से लबरेज़ दिन, एक...
  • बेर के दरख़्त के अनोखे राज़ - *डॉ. फ़िरदौस ख़ान * बेर का दरख़्त सिर्फ़ फल का एक दरख़्त ही नहीं है, बल्कि इसमें बहुत से राज़ पोशीदा हैं. क़ुरआन करीम और मुख़का दरख़्त सिर्फ़ फल का दरख़्त ही नहीं है...
  • Sayyida Fatima al-Zahra Salamullah Alaiha - On this blessed 20th of Jamadi al-Thani, we celebrate the birth of Sayyida Fatima al-Zahra alamullah Alaiha — the Lady of Light, the Mother of the Imams,...
  • میرے محبوب - بزرگروں سے سناہے کہ شاعروں کی بخشش نہیں ہوتی وجہ، وہ اپنے محبوب کو خدا بنا دیتے ہیں اور اسلام میں اللہ کے برابر کسی کو رکھنا شِرک یعنی ایسا گناہ مانا جات...
  • उमरपुरा के सिख भाइयों ने बनवाई मस्जिद - *डॉ. फ़िरदौस ख़ान * हमारे प्यारे हिन्दुस्तान की सौंधी मिट्टी में आज भी मुहब्बत की महक बरक़रार है. इसलिए यहां के बाशिन्दे वक़्त-दर-वक़्त इंसानियत, प्रेम और भाई...
  • 25 सूरह अल फ़ुरक़ान - सूरह अल फ़ुरक़ान मक्का में नाज़िल हुई और इसकी 77 आयतें हैं. *अल्लाह के नाम से शुरू, जो बड़ा मेहरबान निहायत रहम वाला है*1. वह अल्लाह बड़ा ही बाबरकत है, जिसने हक़ ...
  • ਅੱਜ ਆਖਾਂ ਵਾਰਿਸ ਸ਼ਾਹ ਨੂੰ - ਅੱਜ ਆਖਾਂ ਵਾਰਿਸ ਸ਼ਾਹ ਨੂੰ ਕਿਤੋਂ ਕਬੱਰਾਂ ਵਿਚੋਂ ਬੋਲ ਤੇ ਅੱਜ ਕਿਤਾਬੇ-ਇਸ਼ਕ ਦਾ ਕੋਈ ਅਗਲਾ ਵਰਕਾ ਫੋਲ ਇਕ ਰੋਈ ਸੀ ਧੀ ਪੰਜਾਬ ਦੀ ਤੂੰ ਲਿਖ ਲਿਖ ਮਾਰੇ ਵੈਨ ਅੱਜ ਲੱਖਾਂ ਧੀਆਂ ਰੋਂਦੀਆਂ ਤ...

एक झलक

Followers

Search

Subscribe via email

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner

साभार

इसमें शामिल ज़्यादातर तस्वीरें गूगल से साभार ली गई हैं