भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नई दिल्ली में हो रहे जी20 शिखर सम्मेलन से इतर 9 सितम्बर को सिंगापुर, बांग्लादेश, इटली, अमेरिका, ब्राज़ील, अर्जेंटीना, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात के नेताओं के साथ मिलकर वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन (जीबीए) की शुरुआत की.

वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन, जी20 के अध्यक्ष के रूप में भारत की एक पहल है. इस गठबंधन का लक्ष्य प्रौद्योगिकी के विकास को सुविधाजनक बनाना, टिकाऊ जैव ईंधन के उपयोग को बढ़ावा देना, हितधारकों की व्यापक स्तर पर भागीदारी के माध्यम से मज़बूत मानक निर्धारण और प्रमाणन को आकार देकर जैव ईंधन के वैश्विक विकास में तेज़ी लाना है. यह गठबंधन ज्ञान के एक केंद्रीय संग्रह और विशेषज्ञ केंद्र के रूप में भी काम करेगा. जीबीए का लक्ष्य एक ऐसे उत्प्रेरक मंच के रूप में काम करना है, जो जैव ईंधन के विकास और व्यापक रूप से इसे अपनाने के लिए वैश्विक सहयोग को प्रोत्साहन देगा.

जी20 शिखर सम्मेलन के मौक़े पर प्रधानमंत्री द्वारा वैश्विक जैवईंधन गठबंधन (जीबीए) के ऐलान के साथ वैश्विक ऊर्जा के क्षेत्र में आज एक ऐतिहासिक पल दर्ज हुआ.
जीबीए जैव ईंधन को अपनाने की सुविधा के लिए सरकारों, अंतर्राष्ट्रीय संगठनों और उद्योग का गठबंधन विकसित करने के लिए भारत के नेतृत्व वाली एक पहल है. जैव ईंधन के विकास और इसकी पहुंच बनाने के लिए जैव ईंधन के सबसे बड़े उपभोक्ताओं और उत्पादकों को एक साथ लाते हुए इस पहल का उद्देश्य जैव ईंधन को एनर्जी ट्रांसमिशन की कुंजी के रूप में स्थापित करना है. साथ ही नौकरियों और आर्थिक विकास में योगदान देना भी इसका मक़सद है.

जीबीए की घोषणा जी20 प्रेसिडेंट और "वॉयस ऑफ़ द ग्लोबल साउथ" का प्रतिनिधित्व करने के रूप में भारत के सकारात्मक एजेंडे की कार्रवाई-उन्मुख प्रकृति को प्रदर्शित करती है.

जीबीए वैल्यू चेन में क्षमता-निर्माण अभ्यास, राष्ट्रीय कार्यक्रमों के लिए तकनीकी सहायता और नीति पाठ-साझाकरण को बढ़ावा देकर दीर्घकालीन जैव ईंधन के विश्वव्यापी विकास और प्रसार का समर्थन करेगा. यह उद्योगों, देशों, ईकोसिस्टम के प्रतिभागियों और प्रमुख हितधारकों को मांग और आपूर्ति की मैपिंग में सहायता करने के साथ-साथ प्रौद्योगिकी प्रदाताओं को अंतिम उपयोगकर्ताओं से जोड़ने के लिए एक वर्चुअल बाज़ार जुटाने की सुविधा प्रदान करेगा. यह जैव ईंधन अपनाने और व्यापार को प्रोत्साहित करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त मानकों, कोड, स्थिरता सिद्धांतों और विनियमों के विकास, अपनाने और कार्यान्वयन की सुविधा भी प्रदान करेगा.

यह पहल भारत के लिए कई मोर्चों पर लाभदायक होगी. जी20 की अध्यक्षता के एक ठोस परिणाम के रूप में जीबीए, विश्व स्तर पर भारत की स्थिति को मज़बूत करने में मदद करेगा. इसके अलावा गठबंधन सहयोग पर ध्यान केंद्रित करेगा और प्रौद्योगिकी निर्यात और उपकरण निर्यात के रूप में भारतीय उद्योगों को अधिक अवसर प्रदान करेगा. यह भारत के मौजूदा जैव ईंधन कार्यक्रमों जैसे पीएम-जीवनयोजना, सतत और गोबर्धन योजना में तेज़ी लाने में मदद करेगा, जिससे किसानों की आय में वृद्धि, नौकरियां पैदा करने और भारतीय ईकोसिस्टम के समग्र विकास में योगदान मिलेगा. साल 2022 में वैश्विक इथेनॉल बाज़ार का मूल्य 99.06 बिलियन अमेरिकी डॉलर था और 2032 तक 5.1 फ़ीसद की सीएजीआर से बढ़ने और 2032 तक 162.12 बिलियन अमेरिकी डॉलर को पार करने का अनुमान है. आईईए के अनुसार नेट ज़ीरो के लक्ष्य के कारण साल 2050 तक जैव ईंधन में 3.5-5 गुना वृद्धि की संभावना होगी, जो भारत के लिए एक बड़ा अवसर पैदा करेगा.

दुनियाभर के 19 देश और 12 अंतर्राष्ट्रीय संगठन पहले ही इसमें शामिल होने के लिए सहमत हो चुके हैं. 
जीबीए का समर्थन करने वाले जी20 देशों में भारत, अर्जेंटीना, ब्राज़ील, कनाडा, इटली, दक्षिण अफ़्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका शामिल हैं.
जीबीए का समर्थन करने वाले जी20 आमंत्रित देशों में बांग्लादेश, सिंगापुर, मॉरीशस और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं.
जीबीए का समर्थन करने वाले ग़ैर जी20 देशों में आइसलैंड, केन्या, गुयाना, पैराग्वे, सेशेल्स, श्रीलंका और फ़िनलैंड शामिल हैं. युगांडा जीबीए का सदस्य बनने के लिए सहमत हो गया है.

इसमें अंतर्राष्ट्रीय संगठन- विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक, विश्व आर्थिक मंच, विश्व एलपीजी संगठन, यूएन एनर्जी फ़ॉर ऑल, यूनिडो, बायोफ्यूचर्स प्लेट फ़ॉर्म, अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी, अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा मंच, अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी और विश्व बायोगैस एसोसिएशन भी शामिल हैं.
जीबीए सदस्य जैव ईंधन के प्रमुख उत्पादक और उपभोक्ता हैं. संयुक्त राज्य अमेरिका 52 फ़ीसद, ब्राज़ील 30 फ़ीसद और भारत 3 फ़ीसद इथेनॉल के उत्पादन में तक़रीबन 85 फ़ीसद और खपत में 81 फ़ीसद का योगदान करते हैं.



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