नए साल के दोहे

Posted Star News Agency Thursday, January 01, 2026




स्वयं जनवरी हो गई धूप नहाई शाख 

कुहरे में सूरज नया, मलता दीखे आँख 
स्वयं जनवरी हो गई, धूप नहाई शाख।।

तिथियों के अक्षत सजा, नए साल का भाल
जी भर बतियाएँ चलो, ओढ़ गुनगुना शॉल।।

लहरें जितनी तेज़ हैं, उतनी मंथर चाल 
नए साल की नाव पर, तना हवा का पाल।।

नए साल का आइना, देता है आवाज़ 
पल पल गुड़हल हो रही, चेहरा पढ़ती लाज।।

सेंदुर टिकुली चन्द्रमा, सबकी अपनी बात
नया साल लो आ गया, हाथों में ले हाथ।।

क्या क्या बतलाएं भला, वेणी ख़ुशबू गीत
नए साल के होंठ पर, दहक रहा है शीत।।

खटमिट्ठी है बतकही, शब्दों में है लोच
नए साल में चल सके, कहां पुरानी सोच।।

क्षितिज हथेली के सजे, अरुणोदय से गाल 
हाथों में हर दिशा के, पूजा वाला थाल।।

गया साल अब भी जिए, चुक जाने के बाद
नए साल की आँख से, टपक रही है याद।।

मन उजला करने लगी, नए साल की भोर
छंद छंद छूने लगे, कई अनछुए छोर।।

नए साल ने ले लिया, नए समय को अंक 
गए साल के घाट पर, छूटे, सीपी शंख।।
-यश मालवीय


أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ

أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ
I Love Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam

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