एक साल जाता है एक साल आता है।
जाने और आने में जाने क्या नाता है।।
उगते का अभिनन्दन,
ढलते की यादें हैं।
मन-मोहक हैं बंधन,
अनगिनत मुरादें हैं।।
शीत झेल, ग्रीष्म झेल, बारिश में नहाता है।
नस्लों में, फ़स्लों में, काल झिलमिलाता है।।
जाते को हाथ हिला,
आत्मिक विदाई है।
आते से हाथ मिला,
हृदय से बधाई है।।
बीते का प्रतिबिम्बन, पीर-सी जगाता है।
आगत का भाव-बोध, प्रीत बन लुभाता है।।
-कैलाश मनहर
