जाते हुए साल पर एक पुराना गीत
एक याद सिरहाने रखकर...
एक याद सिरहाने रखकर 
एक याद पैताने रखकर 
चला गया ये साल, साल ये चला गया 
खाली से पैमाने रखकर 
भरे-भरे अफ़साने रखकर 
चला गया ये साल, साल ये चला गया 
लम्बी छोटी हिचकी रखकर 
थोड़े आँसू, सिसकी रखकर 
टूटे सपनों के बारे में 
बातें इसकी उसकी रखकर 
गुड़ घी ताल मखाने रखकर 
चिड़ियों वाले दाने रखकर 
चला गया ये साल, साल ये चला गया 
उजियारा, कुछ स्याही रखकर 
कल की नई गवाही रखकर 
लाल गुलाबी हरे बैगनी 
रंग कत्थई काही रखकर 
भूले बिसरे गाने रखकर 
गानों में कु़छ माने रखकर 
चला गया ये साल, साल ये चला गया 
नीली आँखों, चिठ्ठी रखकर 
इमली कु़छ खटमिठ्ठी रखकर 
मुँह में शुभ संकेतों वाली 
बस थोड़ी सी मिट्टी रखकर 
सच के सोलह आने रखकर 
बच्चों के दस्ताने रखकर 
चला गया ये साल, साल ये चला गया।
-यश मालवीय


أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ

أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ
I Love Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam

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सत्तार अहमद ख़ान

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