बहन सैय्यदा ज़ैनब की दुआएँ लेकर जब इमाम घोड़े पर सवार हुए, लगाम कसी तो घोड़ा आगे नहीं बढ़ा, फिर कसकर लगाम खींची तब भी घोड़ा आगे नहीं बढ़ा. जोश में फिर से लगाम खींची, तब भी घोड़ा आगे नहीं बढ़ा. नीचे देखा तो आपकी बेटी सैय्यदा सकीना घोड़े के पांव लपेटे खड़ी हैं.
रोते हुए घोड़े से कह रहीं हैं- घोड़े मेरे बाबा को मत ले जाना. वो रोज़ मुझे सीने से लपेटकर सुलाते हैं, जो गया है वो वापस नहीं आया. बाबा वापस नहीं आए, तो मैं किसके सीने से लिपटकर सोऊंगी?
इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने सैय्यदा को गोद में उठाकर फ़रमाया- बेटा जितने दिन सीने से लिपटकर सोने थे, वो बीत चुके. अब मैं तुम्हें फूफी के सुपुर्द कर रहा हूं. इमाम ने सकीना को सैय्यदा ज़ैनब के सुपुर्द किया और घोड़े पर सवार होकर यज़ीदियों की तरफ़ गए. सैय्यदा सकीना दहाड़ मारकर रोने लगीं.
इमाम ने आसमान की जानिब देखकर मालिक से पूछा- ऐ मालिक तू तो राज़ी है न ?
ग़ैब से निदा आई- ऐ रूह-ए-हुसैन ! तू कामयाब हो गया, तुझपे इंसानियत को फ़ख़्र है, विलायत को फ़ख़्र है, अली को फ़ख़्र है, फ़ातिमा को फ़ख़्र है, मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को फ़ख़्र है तू बता तू राज़ी है न..
-ज़ैद पठान
