जब हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम कर्बला पहुंचे, तब मुस्लिम बिन औसजा रज़ियल्लाहु अन्हु उनके साथ थे. आपकी उम्र 80 साल से ज़्यादा थी. सफ़ेद दाढ़ी होने के बावजूद जंग के मैदान में सबसे आगे थे. आशूरा के दिन मुस्लिम बिन औसजा रज़ियल्लाहु अन्हु ने यज़ीदी फ़ौज के ख़िलाफ़ बहुत बहादुरी से जंग लड़ी. रिवायतों के मुताबिक़ आपने कर्बला में पहली क़तार में होकर दुश्मनों का मुक़ाबला किया. दुश्मन की फ़ौज उनके दबाव को बर्दाश्त नहीं कर सकी. जब आप ज़ख़्मी होकर ज़मीन पर गिरे, तो हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम और हबीब इब्न मज़ाहिर रज़ियल्लाहु अन्हु आपके पास पहुंचे. हजरत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने फ़रमाया- ऐ मुस्लिम अल्लाह तुम पर रहम करे और इसी हालत में आपने शहादत पाई.
प्रेरणादायी उपन्यास है रॉबिन्सन क्रूसो
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*-सरफ़राज़ ख़ान *हाल ही में अंग्रेज़ी के प्रथम उपन्यास ‘रॉबिन्सन क्रूसो’ का
हिन्दी में भावानुवाद पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ। यह भावानुवाद सुप्रसिद्ध
कवि, ...
