30 जून है, जब लखनऊ ने बिरतानियों को सबसे पहली शिकस्त दी थी। वह आज की ही सुबह थी जब एक तरफ फैज़ाबाद से चले मौलवी अहमद उल्ला शाह थे, सूबेदार बरकत अहमद और सामने ईस्ट इंडिया कम्पनी हेनरी लॉरेंस के साथ जंग कर रही थी।
लखनऊ के इस्माइलगंज, चिनहट में आज की सुबह यह लड़ाई शुरू हुई।
मौलवी अहमद उल्ला शाह जो बेहतरीन नेतृत्व कर्ता थे। उनकी ज़बरदस्त रणनीति और बरकत अहमद की सेना की सूझबूझ और साथ थे अवध के किसान और ज़मींदार,जी तोड़कर लड़े और लखनऊ के सबसे पहले किलेबंदी को चिनहट में बिखरा कर रख दिया।
हेनरी लॉरेंस मुट्ठी भर बचे सैनिक लेकर भागा सीधे, रेज़ीडेंसी और वहीं से शुरू हुई लखनऊ में अंग्रेजों की कैद। रेज़ीडेंसी में वह बंधक बना गए। यह अवध के किसानों की हिम्मत, जमींदारों की जद्दोजहद और आम आवाम का पहला जवाब था, जो बिरतानियों को लंदन तक महसूस हुआ कि वह चिनहट, लखनऊ में हार गए।
हमें यह तारीख़ इसलिए नही याद रखनी चाहिए कि हम इन तारीखों को केवल मनाएं,बल्कि सबक़ लें। जब कुशल, निडर, सच्चा नेतृत्व हो और आम इंसान साथ आ जाए, तो हर बड़ी से बड़ी, प्रचंड ताक़त की अहंकार की सत्ता हारती है। इस सबक़ को याद रखना चाहिए। जब तक नेतृत्व और आम अवाम में मुहब्बत का,एक दूसरे की तक़लीफ़ का रिश्ता है, कोई भला हमें कैसे हरा लेगा।
चिनहट में सब जीतोड़ लड़े, अपनी माटी के लिए लड़े, अपनी ज़िंदगी को आर या पार दांव पर लगाकर लड़े, हिन्दू और मुसलमान साथ लड़े, नतीजा यह था कि जिस लखनऊ की सुबह इस जंग से हुई थी, उसकी शाम में विजय का सेहरा अवाम के सर पर था।
आज 30 जून है। आज मौलवी अहमद उल्ला शाह, सूबेदार बरकत अहमद रिसालदार, नाना साहब, तात्या टोपे,मंगल पांडे, बेगम हज़रत महल,बहादुर शाह ज़फ़र, रानी लक्ष्मीबाई और बहुत से वीरों, हिन्दू मुसलमान एकता के जज़्बे से लबरेज़ अवाम,किसान, ज़मींदार और उन सभी पुरखो को याद करने का दिन है, जिन्होंने अपनी मेहनत,जज़्बे, हिम्मत और सूझबूझ से वह बीज डाले, जो हमारा गर्व ही हैं और रास्ता भी हैं।
30 जून, इस्माइल गंज, चिनहट में 1857 कई पहली विजय को याद करते हुए यह याद रखिये, हमारी एकता ही हर उसका जवाब है, जो हमारी तरफ बुरी नज़र से देखता है। हिन्दू मुसलमान की एकता से बिरतानी भी घबराते थे और हारते थे। इसी से उनके समर्थक आजतक घबराते और हारते हैं।
यह हमेशा रहेगा,जो मुल्क की भलाई चाहेगा,वह इस एकता पर ज़ोर देगा और जो मुल्क पर कब्ज़ा करना चाहेगा, वह इसे तोड़ेगा।
30 जून मुबारक!
