कामातुर काग कूक कोयल
चातक चकोर चंचल चंचल
सुरभित समीर सरसर शीतल
आंदोलित होते अतल वितल..!
जल पावस ऋतु के पावक जल!
हर हर हरियाले बंस विकल
फर फर फहराते पत पीपल
नीलम नभ पर नीरद बेकल
भर भर लाते बरसाते जल..!
जल पावस ऋतु के पावक जल!
झरते झर झर विष मेघ प्रबल
श्रावण बरसता चले गरल
पग पग पगते नीरस दलदल
सम्प्रति महेश बनता संबल..!
जल पावस ऋतु के पावक जल!
-ओमा अक्
