तेरा हिज्र मेरा नसीब है तेरा ग़म ही मेरी हयात है
मुझे तेरी दूरी का ग़म हो क्यों तू कहीं भी हो मेरे साथ है
मेरे वास्ते तेरे नाम पर कोई हर्फ़ आए नहीं नहीं
मुझे ख़ौफ़-ए-दुनिया नहीं मगर मेरे रू-ब-रू तेरी ज़ात है
तेरा वस्ल ऐ मेरी दिलरुबा नहीं मेरी किस्मत तो क्या हुआ
मेरी महजबीं यही कम है क्या तेरी हसरतों का तो साथ है
तेरा इश्क़ मुझ पे है मेहरबां मेरे दिल को हासिल है दो जहां
मेरी जान-ए-जां इसी बात पर मेरी जान जाए तो बात है
-निदा फ़ाज़ली
रूहानी सफ़र का सबक़
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हमने अपने रूहानी सफ़र में यही जाना है कि अल्लाह को सिर्फ़ वही शख़्स पा सकता
है, जिसका दिल साफ़ हो यानी जिसके दिल में किसी के लिए भी मैल न हो, यहां तक कि
अपन...
