सौ चांद भी चमकेंगे तो क्या बात बनेगी
तुम आये तो इस रात की औक़ात बनेगी
उनसे यही कह आये कि हम अब न मिलेंगे
आख़िर कोई तक़रीब-ए-मुलाक़ात बनेगी
ये हमसे न होगा कि किसी एक को चाहें
ऐ इश्क़! हमारी न तेरे साथ बनेगी
हैरत कदा-ए-हुस्न कहां है अभी दुनिया
कुछ और निखर ले तो तिलिस्मात बनेगी
-जांनिसार अख्तर
रूहानी सफ़र का सबक़
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हमने अपने रूहानी सफ़र में यही जाना है कि अल्लाह को सिर्फ़ वही शख़्स पा सकता
है, जिसका दिल साफ़ हो यानी जिसके दिल में किसी के लिए भी मैल न हो, यहां तक कि
अपन...
