भूख कई दिनों से उनके साथ चल रही थी।
पेड़ पर बस एक ही दाना बचा था। बच्चे ने उसे तोड़ा और मुँह तक ले गया।
बूढ़े ने उसका हाथ पकड़ लिया।
"इसे मत खा।"
बच्चा रो पड़ा।
"तो क्या करेंगे?"
बूढ़े ने उँगली से मिट्टी कुरेदी। दाना उसमें रख दिया। फिर उसे धीरे-से ढँक दिया।
बच्चा देर तक उस जगह को देखता रहा। फिर बोला : "इससे पेट कब भरेगा?"
बूढ़े ने कोई उत्तर नहीं दिया। उसने चुपचाप मिट्टी पर अपना हाथ रख दिया।
उसी दिन पृथ्वी ने पहली बार मनुष्य का हाथ पकड़ लिया।
-जयप्रकाश मानस
