तेरी यादों से टकराती हैं आंखें
तुझे न पाकर बह जाती हैं आंखें
नज़र उसकी है मुझ पे जब भी उसकी
मेरे जीवन को महकाती हैं आंखें
तेरी राहों को अकसर देखती हैं
मगर तुझको नहीं पाती हैं आंखें
गये लम्हों के गुलदस्ते सजाकर
बिन सोचे चली आती हैं आंखें
-सरफ़राज़ ख़ान
प्रेरणादायी उपन्यास है रॉबिन्सन क्रूसो
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*-सरफ़राज़ ख़ान *हाल ही में अंग्रेज़ी के प्रथम उपन्यास ‘रॉबिन्सन क्रूसो’ का
हिन्दी में भावानुवाद पढ़ने का सुअवसर प्राप्त हुआ। यह भावानुवाद सुप्रसिद्ध
कवि, ...
