ए.एन.खान
      इस वर्ष विश्‍व पर्यावरण दिवस का विषय है ‘’हरित अर्थव्‍यवस्‍था’’। हरित अर्थव्‍यवस्‍था वह है जिसमें पर्यावरण को होने वाले खतरों और पारिस्थितिक कमियों को दूर करते हुए लोगों की भलाई हो सके और सामाजिक समानता कायम हो सके। हरित अर्थव्‍यवस्‍था वह है जिसमें सार्वजनिक और निजी निवेश करते समय इस बात को ध्‍यान में रखा जाए कि कार्बन उत्‍सर्जन और प्रदूषण कम से कम हो, ऊर्जा और संसाधनों की प्रभावोत्‍पादकता बढ़े और जो जैव विविधता और पर्यावरण प्रणाली की सेवाओं के नुकसान को रोकने में मदद करे।

    अगर हरित अर्थव्‍यवस्‍था सामाजिक समानता और सभी को मिलाकर बनती है तो तकनीकी तौर पर आप भी इसमें शामिल हैं। इसलिए हमें एक ऐसी आर्थिक प्रणाली बनानी चाहिए जिसमें यह सुनिश्चित हो सके कि सभी लोगों की एक संतोषजनक जीवन स्‍तर तक पहुंच हो और व्‍यक्तिगत तथा सामाजिक विकास का अवसर मिले।

    दुनिया पहले ही अपनी जैव विविधता का बहुत सा अंश खो चुकी है। वस्‍तुओं और खाद्य वस्‍तुओं की कीमतों पर दबाव समाज पर इसके नुकसान को बताते हैं। इसका जल्‍द से जल्‍द निदान किया जाना चाहिए क्‍योंकि प्रजातियों को नुकसान और पर्यावरण की दुर्दशा का सीधा सम्‍बन्‍ध मानवता की भलाई से है। आर्थिक वृद्धि और प्राकृतिक पारिस्थि‍की तंत्र का कृषि उत्‍पादन में रूपांतरण जारी रहेगा, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इस तरह का विकास प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र के वास्‍तविक मूल्‍य को ध्‍यान में रखकर किया जाए।

   द इकोनॉमिक्‍स ऑफ इकोसिस्‍टम एंड बायोडायवर्सिटी (टीईईडी) की रिपोर्ट के मुख्‍य निष्‍कर्ष थे कि कृषि के लिए रूपांतरण, बुनियादी ढांचे के विस्‍तार और जलवायु परिवर्तन के परिणामस्‍वरूप 2000 में बचे हुए प्राकृतिक क्षेत्र का 11 प्रतिशत हम गंवा सकते हैं। इस समय जमीन का करीब 40 प्रतिशत कृषि के कम प्रभाव वाले स्‍वरूप में है। हो सकता है कि जैव विविधता के कुछ और नुकसान के साथ इसे गहन खेती में रूपांतरित कर दिया जाए। एक अनुमान के मुताबिक अकेले संरक्षित क्षेत्र में 45 अरब अमरीकी डॉलर का वार्षिक निवेश किया जाएगा।

    कुछ क्षेत्रों में शहरों का तेजी से विकास हो रहा है, जबकि अन्‍य में, ग्रामीण इलाके शहरों का रूप ले रहे हैं। शहरों के भीतर प्राकृतिक वृद्धि और नौकरियों तथा अवसरों की तलाश में बड़ी संख्‍या में गांवों से शहरों की और पलायन का महत्‍वपूर्ण हिस्‍सा विकासशील देशों में देखने को मिल रहा है।

    समृद्ध अर्थ्‍व्‍यवस्‍थाओं में शहरी इलाके धन-दौलत और संसाधनों के उपभोग और कार्बनडाइक्‍साइड के उत्‍सर्जन पर संकेन्द्रित रहे हैं। विश्‍व भर में सिर्फ 50 प्रतिशत आबादी पृथ्‍वी के 2 प्रतिशत से भी कम भाग पर रह रही है, शहरी इलाके 60 से 80 प्रतिशत ऊर्जा के इस्‍तेमाल और 75 प्रतिशत कार्बनडाइक्‍साइड उत्‍सर्जन पर संकेन्द्रित कर रहे हैं। इमारतें, परिवहन और उद्योग जिनसे शहर और शहरी इलाके बनते हैं- वैश्विक ऊर्जा-सम्‍बद्ध जीएचजी उत्‍सर्जनों का 25,22 और 22 प्रतिशत योगदान देते हैं।

    कम घने शहर-जो कम प्रति व्‍यक्ति उत्‍सर्जन में मदद करते हैं- आर्थिक वृद्धि के लिए अच्‍छे हैं। विश्‍व की सबसे महत्‍वपूर्ण महानगरीय अर्थव्‍यवस्‍थाएं मात्र 12 प्रतिशत वैश्विक आबादी के साथ वैश्विक जीडीपी का 45 प्रतिशत बनाती है। घनीकरण पूंजी और बुनियादी सुविधाओं सड़कों, रेलवे, पानी और सीवेज प्रणाली की संचालन लागत को कम करती है। हरित शहरी कृषि में नगर निगम के बेकार पानी और अपशिष्‍ट का दोबारा इस्‍तेमाल किया जा सकता है, परिवहन लागत को कम किया जा सकता है, जैव विविधता और आर्द्र भूमि को संरक्षित किया जा सकता है और हरित पट्टी का बेहतर इस्‍तेमाल किया जा सकता है।

     लेकिन शहरों के विकास ने स्‍थानीय पर्यावरण की गुणवत्‍ता पर असर डाला है, साफ पानी और स्‍वच्‍छता के अभाव के कारण गरीब लोग प्रभावित हुए हैं। इसके परिणामस्‍वरूप बीमारियां बढ़ी हैं और आजीविका पर असर पडा है।

     जोखिम को कम करने के उपायों में पारिस्थितिकी तंत्र सेवाएं महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। मुंबई में 2005 में आई बाढ़ का कारण शहर की मीठी नदी का पर्यावरण संरक्षण नहीं करना माना जा रहा था। बाढ़ में 1000 से ज्‍यादा लोग मारे गए थे और शहर का जनजीवन अस्‍त-व्‍यस्‍त हो गया था।

     गांवों से शहरी इलाकों की तरफ पानी भेजने के दौरान पानी का लीकेज गंभीर चिंता का विषय है। पाइपों के उन्नयन और उन्‍हें बदल देने से अनेक औद्योगिक शहरों में 20 प्रतिशत पीने का पानी बचाया जा सकता है। दिल्‍ली में पानी की जबरदस्‍त किल्‍लत से निपटने के लिए नगर निगम ने उन इमारतों में बारिश का पानी जमा करना अनिवार्य बना दिया जिनकी छत का क्षेत्र 100 वर्ग मीटर से ज्‍यादा है। अनुमान लगाया गया है कि प्रति वर्ष 76,500 मिलियन लीटर पानी जमीन पुर्नभरण के लिए उपलब्‍ध हो सकेगा। चेन्‍नई में शहरी जमीन के पानी के पुर्नभरण ने 1988 से 2002 के बीच जमीन के पानी का स्‍तर चार मीटर बढ़ा दिया।

    हरित अर्थव्‍यवस्‍था में नवीकरणीय ऊर्जा उत्‍पादन और बिजली ऊर्जा वितरण, ऊर्जा दक्षत और भंडारण, आर्गेनिक खेती, हरित परिवहन और हरित इमारत जैसे विविध उद्यम शामिल हैं। ऊर्जा दक्ष विद्युत से लेकर बिजली से चलने वाली यात्री ट्रेनों, जैव ईंधन सभी कुछ इसमें सम्मिलित है। यह विभिन्‍न उद.यमों का विविध समूह है जो कम नुकसान पहुंचाने वाले हैं और अधिक समय तक टिक सकते हैं।


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