हरियाणा के नूंह ज़िले के तावडू क़स्बे में आज मेवात विकास सभा के तत्वावधान में मेवात दिवस समारोह भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर वक्ताओं ने मेवात के गौरवशाली इतिहास, देशभक्ति और सामाजिक एकता पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम का आयोजन तावडू के हरद्वारी लाल गोयल राजकीय महाविद्यालय के पुष्पा ऑडिटोरियम में किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी अशोक गर्ग ने की। मुख्य अतिथि ज़िला प्रमुख जान मोहम्मद रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा ज़िलाध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह और पंचायत विभाग के जॉइन्ट डायरेक्टर ऋषि डांगी उपस्थित रहे। कार्यक्रम की शुरुआत में मेवात विकास सभा के अध्यक्ष फ़क़रुद्दीन ने सभी अतिथियों व आगंतुकों का स्वागत किया।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में रिटायर्ड आईएएस अधिकारी अशोक गर्ग ने कहा कि मेवात का इतिहास अत्यंत गौरवशाली रहा है। उन्होंने कहा कि विभाजन के कठिन दौर में मेवात के लोगों ने देश को सर्वोपरि रखा और भारत को नहीं छोड़ा। यही कारण है कि मेवात की धरती देशभक्ति, साहस और त्याग की मिसाल है। उन्होंने कहा कि मेवात से उनका विशेष भावनात्मक लगाव है और यहां आकर उन्हें गर्व की अनुभूति होती है। उन्होंने कहा मेवात का इतिहास सामाजिक सौहार्द का रहा है। जब बाबरी मस्जिद का प्रकरण हुआ तो यहां अन्य क्षेत्रों के मुक़ाबले शान्ति बनी रही। यहां का भाईचारा देश के लिए मिसाल है। उन्होंने बेटियों की शिक्षा और सशक्तिकरण पर ज़ोर देते हुए कहा कि महिलाओं की भागीदारी सभी क्षेत्रों में सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने कहा उन्हें एक बात मेवात की बहुत अच्छी लगती है कि यहां छुआछूत नहीं है, जबकि अन्य इलाक़ों में यह स्थिति अभी भी है। 

क्यों मनाया जाता है मेवात दिवस
वक्ताओं ने बताया कि वर्ष 1947 के विभाजन के समय जब हरियाणा और राजस्थान के मुस्लिम बड़ी संख्या में पाकिस्तान की ओर पलायन कर रहे थे, उस दौरान राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 19 दिसम्बर 1947 को घासेड़ा (गांधी ग्राम) पहुंचे। गांधी जी ने मेवातियों से भारत में ही रहने की मार्मिक अपील की और उन्हें देश की रीढ़ की हड्डी बताते हुए बहादुर क़ौम का ख़िताब दिया। गांधी जी के आह्वान पर लाखों मेवाती पाकिस्तान जाने से रुक गए। इसी ऐतिहासिक घटना की स्मृति में प्रतिवर्ष मेवात विकास सभा द्वारा मेवात दिवस मनाया जाता है।

मेवात विकास सभा के अध्यक्ष फ़क़रुद्दीन ने कहा कि मेवात दिवस मेवात के लोगों की एकता, देशभक्ति और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह दिवस न केवल हमें अपने गौरवशाली इतिहास की याद दिलाता है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को देश और समाज के लिए कार्य करने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने कहा कि मेवात की संस्कृति और परम्परायें हमारी पहचान हैं, जिन्हें सहेजकर आगे बढ़ाना हम सभी की ज़िम्मेदारी है। इस मौक़े पर पूर्व अध्यक्ष उमर पाड़ला ने कहा मेवात का देश की आज़ादी में महत्वपूर्ण योगदान रहा है, लेकिन बावजूद इसके यह क्षेत्र आज भी पिछड़ा हुआ है। उन्होंने मंच से ज़िले में केंद्रीय विद्यालय और फ़ोरलेन सड़क बनवाने तथा बूचड़खानों को बंद करवाने की मांग रखी। उन्होंने आरोप लगाया कि मेवात को विकास के नाम पर बूचड़खाने मिल रहे हैं। उन्होंने सामाजिक बुराइयों को लेकर एकजुटता दिखाने और इनकी रोकथाम को लेकर प्रभावी क़दम उठाने की बात कही। 

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि ज़िला प्रमुख जान मोहम्मद, विशिष्ट अतिथि सुरेन्द्र सिंह, स्पेशल गेस्ट ऋषि डांगी सहित अन्य वक्ताओं ने भी मेवात के इतिहास, संस्कृति और सामाजिक विकास पर अपने विचार रखे।

पुस्तक विमोचन व सम्मान समारोह 
मेवात दिवस समारोह के दौरान 'बेटी हूं बोझ नहीं' पुस्तक का विमोचन किया गया। पुस्तक में बेटियों के अधिकार, शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण पर विस्तृत जानकारी दी गई है।
इसके अलावा समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए हरद्वारी लाल कॉलेज के संस्थापक स्वर्गीय हरद्वारी लाल के पोते बिन्नी गोयल को मेवात रत्न सम्मान से नवाज़ा गया। मेवात विकास सभा के पदाधिकारियों ने उन्हें प्रशंसा पत्र प्रदान कर सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त न्यायिक परीक्षा पास कर जज बनी सुनारी गांव की रुख़साना को मेवात गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया। 

इस अवसर पर मेवात विकास सभा के संरक्षक सद्दीक़ अहमद मेव, पूर्व अध्यक्ष उमर पाड़ला, अख़्तर हुसैन चंदैनी, वरिष्ठ अधिवक्ता रमज़ान चौधरी, दीन मोहम्मद मामलिका, महासचिव सब्बीर अहमद, नगर पालिका तावडू की चेयरपर्सन सुनीता सोनी, मंडी एसोसिएशन के प्रधान संजय गोयल, दानियाल ख़ान, मौलाना शेर मोहम्मद अमीनी, एडवोकेट ताहिर हुसैन देवला, एडवोकेट सलामूदीन, एडवोकेट समय सिंह सलंबा, नवीन लाठर, शमीम धुलावट, अब्दुल सत्तार सुनारी सहित विभिन्न ब्लॉकों के अध्यक्ष और कार्यकारिणी सदस्य बड़ी संख्या में मौजूद रहे।


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