आतिफ़ रब्बानी 
साल 2025 में अर्थशास्त्र के क्षेत्र का नोबेल पुरस्कार नवाचार के नाम रहा। यह पुरस्कार उन शोधकर्ताओं के हिस्से में आया, जिन्होंने यह दिखाया कि कैसे नवाचार आर्थिक विकास को प्रेरित करता है। प्रख्यात अर्थशास्त्री जोएल मोकीर, फिलीप आगियन और पीटर हॉविट को आर्थिक संवृद्धि में नवोन्मेष की भूमिका और रचनात्मक विनाश के ज़रिए विकास को बढ़ावा देने पर किए गए कार्य के लिए दिया गया।
अर्थशास्त्र के नोबेल को औपचारिक रूप से ‘स्वेरिजेस रिक्सबैंक प्राइज़ इन इकोनॉमिक साइंसेज़ इन मेमोरी ऑफ अल्फ्रेड नोबेल’ कहा जाता है। पुरस्कार समिति के अनुसार इन तीनों शिक्षाविदों को ‘नवाचार-प्रेरित आर्थिक विकास की व्याख्या करने के लिए’ प्रदान किया गया। इस पुरस्कार का आधा भाग जोएल मोकीर को प्रदान किया। मोकीर अमेरिका की नॉर्थवेस्टर्न यूनिवर्सिटी एवेनस्टन, इलिनॉय में अर्थशास्त्र के प्राध्यापक हैं। उनका कार्य क्षेत्र वे आर्थिक इतिहास है।

पुरस्कार का शेष आधा भाग संयुक्त रूप से फ़्रांसीसी अर्थशास्त्री फिलीप आगियन और पीटर हॉविट को दिया गया। फिलीप आगियन को ‘तकनीकी प्रगति के माध्यम से सतत विकास के लिए आवश्यक पूर्वशर्तों की पहचान करने’ के लिए नवाज़ा गया। फ़िलीप फ्रांसीसी मूल के हैं, वे पेरिस के कॉलेज दि फ्रांस, इनसीड और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स एंड पॉलिटिकल साइंस, यूनाइटेड किंगडम से संबद्ध हैं। पीटर हॉविट को उनके ‘रचनात्मक विनाश के माध्यम से सतत विकास के सिद्धांत के लिए’ किए गए कार्य को पुरस्कृत किया गया। हॉविट अमेरिका की ब्राउन यूनिवर्सिटी में अर्थशास्त्र के प्रोफ़ेसर हैं।

जोएल मोकीर, जो डच मूल के आर्थिक इतिहासकार हैं, ने यह दर्शाया कि कैसे औद्योगिक क्रांति और उसके बाद नवाचार के कारण लगातार आर्थिक वृद्धि संभव हुई। वे पिछले चार दशक से लगातार इस क्षेत्र में काम कर रहे हैं। उनकी वर्ष 1990 में प्रकाशित पुस्तक ‘द लीवर ऑफ़ रिचेस : टेक्नोलॉजिकल क्रीएटिवटी एण्ड प्रोग्रेस’ विश्व के बौद्धिक तबकों में हाथों-हाथ ली गई। वे अपने शोध में बताते हैं कि तकनीकि पहले भी थी, भले ही बहुत विकसित न हो। लेकिन इस तकनीकि की बदौलत आर्थिक उन्नति के वे रास्ते नहीं तय किए जा सके जैसे कि मौजूदा दौर में। आज के दौर में, विकसित देशों में वार्षिक आर्थिक वृद्धि दर सामान्यतः 1 से 2 प्रतिशत रहती है। लेकिन मध्यकाल के दौर में, पवनचक्की और छापाखाने जैसी तकनीकी खोजों के बावजूद, इतनी विकास दर नहीं देखी गयी थी। 

मोकीर ने दिखाया कि उस समय और आज के समय के बीच का जो अंतर आया है, वह ‘उपयोगी ज्ञान’ की बदौलत है। यही ‘उपयोगी ज्ञान’ नवाचार है, जो वैज्ञानिक समझ पर आधारित होता है। मिसाल के तौर पर अठारहवीं सदी की औद्योगिक क्रांति भाप इंजनों की बदौलत हासिल हुई। भाप की शक्ति या भाप इंजनों का आविष्कार तो सत्रहवीं शताब्दी में हो चुका था, लेकिन भाप की शक्ति का व्यवस्थित प्रयोग इंजन में किए गए नवाचार से ही संभव हो सका। जब इसका प्रयोग रेलवे, पानी के जहाज़ और फैक्ट्रियों के चलाने में किया जाने लगा। 
      
फिलीप आगियन और पीटर हॉविट ने 1992 में एक मॉडल प्रस्तुत किया था, जो दिखाता है कि यह पूरी प्रक्रिया वास्तव में ‘क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन’ ही है। उनका मॉडल दिखलाता है कि कैसे नए उत्पाद और वस्तुओं का विपणन करनेवाली कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा से नवाचार को बढ़ावा मिलता है। इस नवाचार से बाजार में पुरानी वस्तुएँ नए उत्पादों से प्रतिस्थापित होती हैं, जो पहले से बेहतर बेहतर होते हैं। मिसाल के तौर पर म्यूजिक इंडस्ट्री को ही लीजिए। पहले विनाइल रेकॉर्ड्स हुआ करते थे, फिर ऑडियो मैग्नेटिक टेप आए, इसके बाद सीडी का दौर आया, और अब फ्लैश ड्राइव और क्लाउड के जरिए संगीत का विपणन होता है। ज़ाहिर है कि आखिरी दौर तक पहुँचने के लिए पहले की इंडस्ट्रियों का ‘डिस्ट्रक्शन’ यानी विनाश होना पड़ा। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया से नए प्रकार के उद्योग और बेहतर उत्पाद का सृजन हुआ। इसीलिए आगियन और हॉविट ने इसको ‘रचनात्मक विनाश’ के नाम से पुकारा। हालांकि इनसे बहुत पहले जोसेफ शुम्पीटर ने क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन की शब्दावली का प्रयोग अपनी पुस्तक ‘कैपिटलिज्म, सोशलिज्म एंड डेमोक्रेसी’ में किया था। उनका मानना था कि आर्थिक विकास एक स्थिर संतुलन को तोड़ने वाली नवाचार की प्रक्रिया है। उद्यमी नवाचार के माध्यम से अर्थव्यवस्था में क्रांति लाते हैं, जो नए उत्पादों, उत्पादन विधियों या बाजारों के विकास से होता है। इस नवाचार से अर्थव्यवस्था में चक्रीय उतार-चढ़ाव आते हैं, जो आर्थिक विकास को गति प्रदान करते हैं। दूसरे शब्दों में, विकास के पीछे व्यवसायों और उत्पादों का निरंतर परिवर्तन होता है। इस तरह से आगियन और हॉविट ने शुम्पीटर के सिद्धांत को प्रामाणिकता प्रदान की – अनुभवजन्य आँकड़ों और गणितीय मॉडलों से सिद्ध किया। जो वर्ष 1992 में प्रतिष्ठित जर्नल ‘इकोनॉमेट्रिका’ में ‘ए मॉडल ऑफ़ ग्रोथ थ्रू क्रिएटिव डिस्ट्रक्शन’ के शीर्षक से छपा।


आज दुनिया के विकासशील देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन जैसी तकनीकी को संशय की दृष्टि से देख रहे हैं। आधुनिक तकनीकि के सामाजिक परिणाम को लेकर ऊहापोह की स्थिति है। वहीं इन नोबेल विजेता अर्थशास्त्रियों काम बताता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता-जैसी तकनीकि के ज़रिए विकास के नए रास्ते खोजे जा सकते हैं। आगियन नैशनल ब्यूरो ऑफ़ इकनॉमिक रिसर्च के एक वर्किंग पेपर ‘आर्टिफ़ीशियल इन्टेलिजेन्स एण्ड इकनॉमिक ग्रोथ’ में बताते हैं, कृत्रिम बुद्धिमत्ता की बदौलत तकनीकि खोज पहले से कहीं अधिक आसान हो जाएगी। एआई जैसी अच्छी और सुलभ तकनीकि विकास की बड़ी क्षमता रखती है। इसके साथ-साथ वे चुनौती को भी रेखांकित करते हैं। वे कहते हैं, ‘एआई की चुनौती यह है कि इस क्षमता को कैसे सही दिशा में लगाया जाए’। 
जोएल मोकीर, फिलीप आगियन और पीटर हॉविट के कार्यों से भारत के नीतिकारों को भी सबक़ लेना चाहिए। आर्थिक विकास की इबारत शोध, अनुसंधान और नवाचार के ज़रिए ही लिखी जा सकती है। अनुसंधान और विकास में व्यय के आँकड़े बताते हैं साल दर साल अनुसंधान पर किया गया ख़र्च स्थिर बना हुआ है। आँकड़े बताते हैं कि अनुसंधान और विकास पर किया गया खर्च सकल घरेलू उत्पाद के प्रतिशत के रूप में कभी भी 1 प्रतिशत तक भी नहीं पहुँच सका। देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिये तकनीक अवसंरचना और अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करना होगा। इसके लिए वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने व वित्त पोषण तंत्र में सुधार करने की भी आवश्यकता है।

नोबेल पुरस्कृत अर्थशास्त्रियों के कार्य से हम सीख सकते हैं कि विकास के लिए अनुकूल और उर्वर माहौल को हल्के में नहीं लेना चाहिए। समाज को ऐसे तत्वों पर ध्यान देना चाहिए जो विकास को जन्म देते हैं और बनाए रखते हैं, जैसे कि विज्ञान-आधारित नवाचार, रचनात्मक विध्वंस, और परिवर्तन के लिए खुला समाज।


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