क्या वसंत का मोल है जब न प्रियतम पास?
कोयल की हर कूक में पिया मिलन की आस।।
अमराई के संग में पीले सरसों फूल।
किसके सर बिन्दी लगे किसके माथे धूल।।
रस कानों में घोलती मीठी कोयल-तान।
उस मिठास के दर्द से प्रायः सब अनजान।।
पतझड़ ने आकर कहा आये द्वार वसंत।
नव-जीवन सबके लिए विरहिन खोजे कंत।।
सुमन सरस होता गया मिला जहां ऋतुराज।
रोटी जिसको न मिले बेचे तन की लाज।।
-श्यामल सुमन
पापा की बरसी
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ज़िन्दगी में कुछ वाक़ियात ऐसे हुआ करते हैं, जो इंसान को भीतर से तोड़ देते हैं.
पापा का जाना भी एक ऐसा ही वाक़िया है. कहते हैं कि किसी लड़की का किसी मर्द से
प...
