क्या वसंत का मोल है जब न प्रियतम पास?
कोयल की हर कूक में पिया मिलन की आस।।
अमराई के संग में पीले सरसों फूल।
किसके सर बिन्दी लगे किसके माथे धूल।।
रस कानों में घोलती मीठी कोयल-तान।
उस मिठास के दर्द से प्रायः सब अनजान।।
पतझड़ ने आकर कहा आये द्वार वसंत।
नव-जीवन सबके लिए विरहिन खोजे कंत।।
सुमन सरस होता गया मिला जहां ऋतुराज।
रोटी जिसको न मिले बेचे तन की लाज।।
-श्यामल सुमन
ग़ालिब की डायरी है दस्तंबू
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*फ़िरदौस ख़ान*
हिन्दुस्तान के बेहतरीन शायर मिर्ज़ा ग़ालिब ने उर्दू शायरी को नई ऊंचाई दी.
उनके ज़माने में उर्दू शायरी इश्क़, मुहब्बत, विसाल, हिज्र और हुस्...
