जिन दिनों

Posted Star News Agency Monday, November 03, 2025


जिन दिनों 
जिन दिनों कुछ नहीं होता हमारे पास 
निःशस्त्र होते हैं एक हारे हुए योद्धा से 
उन दिनों भी बची होती है एक झीनी से उम्मीद बदलाव की 
जिन दिनों बहुत लंबे और थकाऊ होते हैं रास्ते 
पग पग पर बैठे होते हैं फ़िकरे कसने वाले 
राह में होते हैं लोभ भरे आमंत्रण 
बहला रही होती हैं मायावी विकास योजनाएं 
उन दिनों भी एक विवेक बचा होता है 
समझदारी भरी छांव का 
जिन दिनों नहीं पूछता कोई हाल चाल आपका 
व्यवस्था भी हाशिये पर डाल देती है नाकारा समझ 
परिचित भी नहीं देते भाव 
अवसर भी निकल  जाते हैं कन्नी काट 
उन दिनों गहता है कोई आपका हाथ 
चलता है दूर तक साथ 
शायद इसी को जिजीविषा कहते हैं 
जब सामने होता है आपका नैराश्य 
बार बार कोंचता है एकाकीपन 
छुड़ाने लगती हैं मुस्कानें अपनी उँगलियाँ 
छिटकने लगते हैं हौंसले मुट्ठियों से 
तो किसी का प्यार भरा काँधे पर हाथ 
या आत्मा से दिया हुआ आशीर्वाद 
देता है अनंत प्रकाश 
अपार ऊर्जा 
फिर चल देता है बटोही 
ओढ़ कर नई कामरिया सफ़र की ओर
-डॉ. अतुल चतुर्वेदी 


أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ

أنا أحب محم صَلَّى ٱللّٰهُ عَلَيْهِ وَآلِهِ وَسَلَّمَ
I Love Muhammad Sallallahu Alaihi Wasallam

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सत्तार अहमद ख़ान

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