यूँ ही न मुस्लिमीन का जज़्बा हुसैन हैं
इस्लाम के उरूज का चेहरा हुसैन हैं
یوں ہی نہ مسلمین کا جذبہ حسین ہیں
اسلام کے عروج کا چہرہ حسین ہیں
इस्लाम का दरख़्त लगाया नबी ने पर
इस्लाम के दरख़्त का साया हुसैन हैं
इस्लाम के दरख़्त का साया हुसैन हैं
اسلام کا درخت لگایا نبی نے پر
اسلام کے درخت کا سایا حسین ہیں
रोती है उनकी याद में इंसानियत तमाम
क़ल्बों में देखो आज भी ज़िंदा हुसैन हैं
क़ल्बों में देखो आज भी ज़िंदा हुसैन हैं
روتی ہے ان کی یاد میں انسانیت تمام
قلبوں میں دیکھو اج بھی زندہ حسین ہیں
कुल्फ़त में सब्र आता है ज़िक्र-ए-हुसैन से
दुखते हुए दिलों का सहारा हुसैन हैं
दुखते हुए दिलों का सहारा हुसैन हैं
کلفت میں صبر آتا ہے ذکرِ حسین سے
دختے ہوئے دلوں کا سہارا حسین ہیں
नामूस-ए-नूर-ए-ऐन-ए-अली में मैं क्या कहूँ
ईमाँ, सुकूँ, ग़ुरूर हमारा हुसैन हैं
ईमाँ, सुकूँ, ग़ुरूर हमारा हुसैन हैं
ناموسِ نورِ عَینِ علی میں میں کیا کہوں
ایماں سکوں غرور ہمارا حسین ہیں
यूँ तो बहुत हुए हैं वली,औलिया मगर
इस्लाम के फ़लक पे सितारा हुसैन हैं
इस्लाम के फ़लक पे सितारा हुसैन हैं
یوں تو بہت ہوئے ہیں ولی اولِیا مگر
اسلام کے فلک پہ ستارہ حسین ہیں
रौनक़ बिना हुसैन के होगी न ख़ुल्द में
जन्नत की वादियों का नज़ारा हुसैन हैं
जन्नत की वादियों का नज़ारा हुसैन हैं
رونق بنا حسین کے ہوگی نہ خلد میں
جنّت کی وادیوں کا نظارہ حسین ہے
तारीफ़ में हुसैन की 'यावर' मैं क्या कहूँ
मंज़िल अगर ख़ुदा है तो रस्ता हुसैन हैं
मंज़िल अगर ख़ुदा है तो रस्ता हुसैन हैं
-यावर अली
تعارف میں حسین کی یاور میں کیا کہوں
منزل اگر خدا ہے تو رستہ حسین ہیں
یاور علی -
